आसमान से आग और समंदर से आफत: भारत में दिखा मौसम का सबसे अनोखा रूप

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भारत में इस समय मौसम का बहुत ही अजीब और खतरनाक रूप देखने को मिल रहा है। देश के दो अलग-अलग हिस्सों में मौसम बिल्कुल विपरीत करवट ले रहा है। उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में सूरज की तपिश लगातार बढ़ रही है और आसमान से आग बरस रही है जिससे लोग भीषण लू की चपेट में हैं। वहीं दूसरी तरफ दक्षिण भारत के राज्यों में काले बादलों ने डेरा डाल लिया है और वहां भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम के इस डबल अटैक के पीछे वैज्ञानिक अल नीनो इफेक्ट को एक बड़ा कारण मान रहे हैं जो पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत के मौसम चक्र को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

उत्तर भारत में लू का कहर और रिकॉर्ड तोड़ता तापमान

उत्तर प्रदेश दिल्ली पंजाब हरियाणा और राजस्थान समेत पूरा उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। दिन के समय गर्म हवाएं यानी लू चलना शुरू हो गई हैं जिससे दोपहर में सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया है। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। रात के समय भी तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है जिससे लोगों को चौबीसों घंटे गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। इस तपती गर्मी ने बिजली और पानी की मांग को भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है।

दक्षिण भारत में बादलों का डेरा और भारी बारिश की चेतावनी

एक तरफ जहां उत्तर भारत पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है और आसमान सूख चुका है वहीं दक्षिण भारत के राज्यों में मौसम बिल्कुल अलग है। केरल कर्नाटक तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण इन राज्यों में मानसून से पहले की बारिश बहुत ज्यादा सक्रिय हो गई है। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है और तेज हवाओं के चलते पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति ठप होने की खबरें आ रही हैं। मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

आखिर क्या है यह अल नीनो इफेक्ट और यह कैसे डालता है असर

मौसम के इस असंतुलन के पीछे अल नीनो एक बहुत बड़ी वजह है। अल नीनो एक प्राकृतिक कूटनीतिक और समुद्री घटना है जो प्रशांत महासागर में घटित होती है। सामान्य तौर पर प्रशांत महासागर का पानी एक निश्चित तापमान पर रहता है लेकिन अल नीनो के सक्रिय होने पर भूमध्य रेखा के पास समुद्र का पानी असामान्य रूप से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है। समुद्र के गर्म होने का यह असर पूरी दुनिया की हवाओं और बादलों के रुख को बदल देता है। भारत के संदर्भ में जब भी अल नीनो मजबूत होता है तो यह सामान्य मानसून को कमजोर करता है और देश में गर्मी तथा सूखे की स्थिति पैदा करता है। इस बार भी अल नीनो के प्रभाव के कारण ही देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का ऐसा चरम रूप देखने को मिल रहा है।

आम जनजीवन पर असर और स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टरों की सलाह

मौसम के इस डबल अटैक ने आम लोगों की मुश्किलों को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। उत्तर भारत में डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर के समय सीधे धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है और शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए लगातार तरल पदार्थ पीते रहने को कहा है। वहीं दक्षिण भारत में लोगों को जलभराव और भारी बारिश के कारण होने वाली बीमारियों से सावधान रहने को कहा गया है। कृषि क्षेत्र पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है क्योंकि असमय बारिश और अत्यधिक गर्मी दोनों ही फसलों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही हैं। आने वाले दिनों में मौसम का यह मिजाज कैसा रहेगा इस पर वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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