ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स का नया केंद्र बनी दिल्ली: वेनेजुएला की एक्टिंग प्रेसिडेंट और पीएम मोदी की मुलाकात पर क्यों टिकी हैं डोनाल्ड ट्रंप की नजरें

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वैश्विक कूटनीति के लिहाज से राजधानी दिल्ली इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय दौरे की गवाह बन रही है। वेनेजुएला की एक्टिंग प्रेसिडेंट डेल्सी रोड्रिगेज 3 जून से 7 जून 2026 तक भारत की पांच दिवसीय कामकाजी यात्रा पर नई दिल्ली पहुंच चुकी हैं। आज यानी 4 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता होनी है। दोनों देशों के बीच होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक पर भारत और लैटिन अमेरिका ही नहीं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी पैनी नजरें टिकी हुई हैं। ईरान युद्ध और हॉरमुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण पैदा हुए वैश्विक तेल संकट के बीच भारत और वेनेजुएला की यह नजदीकी बेहद रणनीतिक मोड़ पर पहुंच गई है।

ईरान संकट के बीच भारत के लिए क्यों जरूरी हुआ वेनेजुएला का तेल

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। वर्तमान में चल रहे अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण हॉरमुज जलडमरूमध्य का रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो चुका है जहां से भारत का लगभग 40 फीसदी कच्चा तेल गुजरता था। इस बड़े संकट से निपटने और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने वेनेजुएला से तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा दिया है।

हालिया आंकड़ों के मुताबिक भारत मई महीने में प्रतिदिन 4,27,000 बैरल कच्चे तेल की खरीद के साथ वेनेजुएला का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) जैसी भारतीय कंपनियां वेनेजुएला के भारी और हाई-सल्फुर कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सबसे आगे हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने के लिए यह मुलाकात बेहद खास मानी जा रही है।

डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन की क्यों है इस दौरे पर नजर

इस पूरे दौरे के पीछे की असली कहानी वाशिंगटन और वेनेजुएला के बदले हुए राजनीतिक समीकरणों से जुड़ी है। जनवरी 2026 में अमेरिकी सेना द्वारा तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने वेनेजुएला की सत्ता संभाली थी। वर्तमान में वेनेजुएला की तेल बिक्री से होने वाली पूरी कमाई अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा संचालित बैंक खातों के जरिए नियंत्रित की जा रही है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत आने से पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि अमेरिका भारत को उतना तेल बेचने में मदद करने के लिए तैयार है जितना भारत खरीदना चाहे। डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन चाहता है कि भारत वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाए जिससे चीन पर वेनेजुएला की निर्भरता कम हो और साथ ही अमेरिका के नियंत्रण वाले फंड में इजाफा हो सके। भारत के जरिए वेनेजुएला के तेल बाजार को संचालित करना ट्रंप की नई विदेश नीति का एक बड़ा हिस्सा है।

एनर्जी से लेकर फार्मा सेक्टर तक सहयोग बढ़ाने पर होगा जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एक्टिंग प्रेसिडेंट डेल्सी रोड्रिगेज के बीच होने वाली इस चर्चा में केवल कच्चा तेल ही नहीं बल्कि द्विपक्षीय संबंधों का पूरा दायरा शामिल रहेगा। इस दौरे पर वेनेजुएला का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है जिसमें वहां के विदेश मंत्री वित्त मंत्री और विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्री शामिल हैं।

यह प्रतिनिधिमंडल भारत की तकनीकी क्षमता को समझने के लिए देश के प्रमुख एनर्जी फार्मास्युटिकल्स (दवा उद्योग) और ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े प्लांट्स का दौरा भी करेगा। भारत वेनेजुएला को दवाओं और तकनीकी सहायता का बड़ा निर्यातक रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच यह मुलाकात ग्लोबल साउथ के दो महत्वपूर्ण देशों के आपसी आर्थिक और रणनीतिक हितों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का काम करेगी।

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