दुनियाभर के बाजारों में मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब में एक अहम तेल पाइपलाइन के संचालन पर असर पड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से ऊपर चले गए। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI भी 100 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया।
तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब दुनिया पहले से ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर नजर बनाए हुए है। तेल की सप्लाई को लेकर किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है और निवेशक भविष्य में सप्लाई कम होने की आशंका से कीमतों में तेजी देखने लगते हैं।
भारत के लिए भी यह खबर बेहद अहम है, क्योंकि देश अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर लंबे समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, ट्रांसपोर्टेशन लागत और दूसरी चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका असर तुरंत आम आदमी की जेब पर कितना पड़ेगा, यह कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करेगा। इनमें रुपये की डॉलर के मुकाबले स्थिति, सरकार की नीतियां और घरेलू ईंधन कीमतों को लेकर कंपनियों के फैसले शामिल हैं।
इस बीच भारतीय रुपया भी दबाव में बना हुआ है। महंगे कच्चे तेल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण मुद्रा बाजार में भी हलचल देखने को मिल रही है।
फिलहाल दुनिया की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिकी है। अगर तनाव और बढ़ता है या तेल की सप्लाई पर लंबे समय तक असर पड़ता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
××××××××××××××
Telegram Link :
For latest news, first Hand written articles & trending news join Saachibaat telegram group