अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल फिसलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है। पिछले कुछ महीनों से जारी अंतरराष्ट्रीय तनाव और उतार-चढ़ाव की वजह से तेल के दाम काफी ऊंचे स्तर पर बने हुए थे, लेकिन अब वैश्विक सप्लाई सुधरने से कीमतों में तेजी से नरमी आई है। ऐसे में देश के करोड़ों वाहन चालकों और आम नागरिकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या अब भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम कम होंगे।
कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद तुरंत क्यों नहीं घट रहे दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने के बावजूद भारतीय पेट्रोल पंपों पर इसका असर तुरंत देखने को नहीं मिल रहा है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है भारतीय तेल कंपनियों का पुराना घाटा। दरअसल, जब पिछले दिनों क्रूड ऑयल बहुत ज्यादा महंगा हो गया था, तब सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता को महंगाई के झटके से बचाने के लिए पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में उस हिसाब से बढ़ोतरी नहीं की थी। इसकी वजह से कंपनियों को काफी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था। अब जब क्रूड ऑयल सस्ता हुआ है, तो कंपनियां सबसे पहले अपने उसी पुराने घाटे की भरपाई कर रही हैं।
कब तक मिल सकती है आम जनता को राहत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं, तो सरकारी तेल कंपनियां आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की दरें घटाने पर विचार कर सकती हैं। जैसे ही कंपनियों का घाटा पूरा हो जाएगा, वे चरणबद्ध तरीके से खुदरा दामों में कटौती का फायदा आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाना शुरू करेंगी। फिलहाल देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम पुरानी दरों पर ही स्थिर बने हुए हैं, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख ऐसा ही रहा, तो बहुत जल्द लोगों को सस्ती ईंधन दरों की राहत मिल सकती है।
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