ईजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष में अमेरिका की भी एंट्री हो गई है। अमेरिका ने रविवार को ईरान के तीन परमाणु प्रतिष्ठानों, फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हवाई हमला किया। अमेरिका का दावा है कि इस हमले में ईरान के इन न्यूक्लियर ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, ईरान ने अमेरिका के इस दावे के सिरे से खारिज किया है और कहा कि इस हमले में कुछ खास नुकसान नहीं हुआ है।
अमेरिका का प्रतिक्रिया
अमेरिका ने बताया कि इस हमला को अंजाम देने के लिए काफी समय पहले से तैयारी की जा रही थी। इस ऑपरेशन का नाम मिडनाइट हैमर रखा गया था। अमेरिका का दावा है कि दुनिया में कोई भी अन्य देश इस ऑपरेशन को अंजाम नहीं दे सकता था, जो अमेरिका की सेना ने कर दिखाया। रविवार को अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने एक प्रेस ब्रीफिंग दी। इसमें उन्होंने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के बारे में बताया।
ट्रंप ने हमला करने का क्यों लिया फैसला?
पूछे जाने पर पीटर हेगसेथ ने कहा, ट्रंप शांति प्रक्रिया के पक्ष में थे और कूटनीतिक हल चाहते थे. लेकिन ईरान की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला. कोई एक खास पल नहीं था, लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब लगा कि अब कार्रवाई जरूरी है. जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान में तख्तापलट चाहता है. इस पर पीटर हेगसेथ ने कहा, इस मिशन का मकसद सत्ता परिवर्तन नहीं था. राष्ट्रपति ट्रंप ने केवल ईरानी परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए सटीक सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दी, ताकि अमेरिका, हमारे सैनिकों और सहयोगी इजरायल की सुरक्षा की जा सके. हमले से जो चाहा, वो मिला. उन्होंने कहा, हमारी सभी मिसाइलें अपने लक्ष्यों पर सही तरीके से लगीं.
डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन करने का दिया आदेश
अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह ऑपरेशन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर चलाया गया। उन्होंने कहा, ‘ये मिशन साहसिक और शानदार था, और इससे दुनिया को ये मैसेज गया कि अमेरिका की ताकत वापस आ चुकी है। जब ये राष्ट्रपति बोलता है, दुनिया सुनती है।’
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