दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय मालवाहक जहाज हाजी अली पर एक बड़ा हमला हुआ है। जानकारी के मुताबिक संदिग्ध ड्रोनों ने ओमान के तट के करीब इस जहाज को निशाना बनाया जिसके बाद इसमें भीषण आग लग गई। काफी कोशिशों के बावजूद जहाज को बचाया नहीं जा सका और वह समंदर में समा गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार चालक दल के सभी सदस्यों को समय रहते बचा लिया गया है। भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बताया है।
कैसे हुआ यह ड्रोन हमला
भारतीय झंडे वाला जहाज हाजी अली अपनी सामान्य यात्रा पर था जब ओमान के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इसे टारगेट किया गया। शुरुआती खबरों के अनुसार दो आत्मघाती ड्रोनों ने सीधे जहाज के इंजन रूम और पिछले हिस्से पर प्रहार किया जिससे वहां जोरदार धमाके हुए और आग लग गई। भारतीय नौसेना के जहाज सूचना मिलते ही बचाव के लिए निकले लेकिन तब तक हाजी अली काफी हद तक डूब चुका था। चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालकर पास के सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है।
विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख
इस घटना के सामने आते ही भारतीय विदेश मंत्रालय MEA ने बेहद सख्त बयान जारी किया है। भारत ने साफ कहा है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन हैं और इन्हें किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मांग की है कि समुद्री रास्तों की सुरक्षा बढ़ाई जाए और इस हमले के पीछे जो भी ताकतें हैं उन्हें जल्द से जल्द बेनकाब किया जाए। भारत इस मामले की अपनी स्तर पर भी पूरी जांच कर रहा है।
समुद्री व्यापार पर गहराया संकट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह इलाका है जहां से दुनिया भर के तेल की बड़ी सप्लाई होती है। भारतीय जहाज पर हुए इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन हमलों की यह तकनीक अब व्यापारिक जहाजों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है। इस घटना के बाद भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी गश्त और निगरानी को कई गुना बढ़ा दिया है ताकि अन्य जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
आगे क्या होगा भारत का कदम
भारत अब इस मुद्दे को दुनिया के बड़े मंचों पर उठाने की तैयारी में है। सरकार की प्राथमिकता अब चालक दल को वापस लाना और समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए नई रणनीति तैयार करना है। आने वाले समय में इस रूट से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा कवच दिया जा सकता है। रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय लगातार ओमान और अन्य सहयोगी देशों के संपर्क में हैं ताकि भविष्य में ऐसी वारदातों को रोका जा सके।
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