भारतीय वायुसेना में एक ऐसा इतिहास लिखा गया है, जो आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं के लिए मिसाल बनेगा। एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने गैर-चिकित्सकीय क्षेत्र से इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी बनकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने एक सितंबर को वायुसेना मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) का पदभार संभाला।
शक्ति शर्मा का यह सफर अचानक नहीं बना। उन्होंने 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की शिक्षा शाखा से अपने सैन्य करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों, क्षेत्रीय इकाइयों, कमान मुख्यालय और वायुसेना मुख्यालय में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं।
उनके करियर की खास बात सिर्फ उनका नया पद नहीं है। शक्ति शर्मा सैनिक स्कूल की प्रधानाचार्य बनने वाली पहली महिला अधिकारी भी रह चुकी हैं। उन्होंने कपूरथला के सैनिक स्कूल में प्रधानाचार्य के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी।
शिक्षा और रक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण काम किया। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर और पुणे विश्वविद्यालय में वायुसेना की उत्कृष्टता पीठ स्थापित करने जैसी पहलों में भूमिका निभाई, जिससे शिक्षा और रक्षा के बीच सहयोग को बढ़ावा मिला।
शक्ति शर्मा की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि लंबे समय तक सेना में महिलाओं के लिए वरिष्ठ नेतृत्व के रास्ते सीमित रहे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तस्वीर लगातार बदल रही है। आज महिलाएं सैन्य सेवाओं के अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभाल रही हैं और ऊंचे पदों तक पहुंच रही हैं।
शक्ति शर्मा की कहानी सिर्फ एक पदोन्नति की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है, जिसमें एक महिला ने तीन दशक से ज्यादा समय तक अपने काम के जरिए आगे बढ़ते हुए उस मुकाम को हासिल किया, जहां पहुंचना कभी महिलाओं के लिए लगभग असंभव माना जाता था।
उनकी यह उपलब्धि भारतीय वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है और उन युवतियों के लिए भी प्रेरणा है, जो आने वाले समय में वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना देखती हैं।
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