150 साल का ‘वंदे मातरम’ और 80वां स्वतंत्रता दिवस: क्रांति का वो तराना जिसने पूरे भारत को एक धागे में पिरो दिया

80th Independence Day 2

इस बार का स्वतंत्रता दिवस हर भारतीय के लिए बेहद खास है। एक तरफ जहां पूरा देश अपनी आज़ादी का जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ हमारे राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 साल भी पूरे हो रहे हैं। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के कलम से निकले इन चंद शब्दों ने उस दौर में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पूरी दिशा ही बदल दी थी। जब देश अंग्रेजों की गुलामी में जकड़ा हुआ था और लोगों के मन में निराशा छाई हुई थी, तब ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं बना, बल्कि भारत माता को नमन करने का सबसे बड़ा महामंत्र बन गया था।

1870 के दशक में जब यह गीत लिखा गया, तब अंग्रेजों ने हर जगह अपना दबदबा बनाया हुआ था। लेकिन जब बंकिमचंद्र ने अपनी रचना में भारत भूमि को एक ममतामयी मां के रूप में चित्रित किया, तो देशवासियों के दिलों में अपनी मिट्टी के प्रति सोई हुई चेतना जाग उठी। आगे चलकर स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह तराना हर क्रांतिकारी, हर जनसभा और हर जुलूस का मुख्य नारा बन गया। चाहे भगत सिंह हों, चंद्रशेखर आजाद हों या फिर देश का कोई आम नागरिक, अंग्रेजों के जुल्म सहते वक्त हर किसी की जुबान पर बस एक ही शब्द होता था—’वंदे मातरम’।

अंग्रेज हुकूमत इस गीत की गूंज से इस कदर डर गई थी कि उन्होंने इस पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी थी। लेकिन यह नारा लोगों के दिलों में इस कदर उतर चुका था कि जेल की सलाखों के पीछे से लेकर फांसी के फंदे तक इसे पूरी ताकत के साथ गाते रहे। इसने देश के कोने-कोने में बसे लोगों को जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठाकर केवल ‘भारतीय’ होने का अहसास कराया और पूरे देश को एक धागे में पिरो दिया।

आज जब हम एक स्वतंत्र और सशक्त भारत की हवा में सांस ले रहे हैं, तो ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होना हमें उन अनगिनत कुर्बानियों की याद दिलाता है। यह गीत केवल हमारे इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि आज के आधुनिक भारत में भी देश के प्रति समर्पण, एकता और गर्व की भावना को जिंदा रखने की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

××××××××××××××
Telegram Link :
For latest news, first Hand written articles & trending news join Saachibaat telegram group

https://t.me/joinchat/llGA9DGZF9xmMDc1

Share:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *