PCOD और PCOS में व्यायाम का महत्त्व: जानिए कैसे रोजाना की कसरत से कंट्रोल हो सकती है यह बीमारी

PCOS

आजकल की बिगड़ी जीवनशैली, तनाव और खान-पान की गलत आदतों की वजह से महिलाओं में PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज) और PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। वजन का अचानक बढ़ना, चेहरे पर मुहासे या अनचाहे बाल आना, पीरियड्स का अनियमित होना और चिड़चिड़ापन इसके मुख्य लक्षण हैं। कई महिलाएं सोचती हैं कि केवल दवाइयां खाने से यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाएगी, लेकिन सच तो यह है कि PCOS और PCOD के इलाज में 70% भूमिका आपकी डाइट और रोजाना के व्यायाम (वर्कआउट) की होती है। नियमित रूप से कसरत करना इस समस्या को जड़ से काबू करने का सबसे आसान और असरदार तरीका है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में मददगार

PCOS की समस्या से जूझ रही लगभग 70 से 80 प्रतिशत महिलाओं के शरीर में इंसुलिन सही से काम नहीं करता, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं। जब आप व्यायाम करती हैं, तो शरीर की मांसपेशियां खून में मौजूद ग्लूकोज का इस्तेमाल करने लगती हैं। इससे शरीर में बढ़ा हुआ इंसुलिन का स्तर नीचे आने लगता है। जब इंसुलिन कंट्रोल में होता है, तो ओवरी से पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का बनना कम हो जाता है, जिससे अनियमित पीरियड्स की समस्या धीरे-धीरे ठीक होने लगती है।

वजन घटाने और फैट बर्न करने में सबसे ज्यादा कारगर

PCOS में वजन बढ़ाना जितना आसान होता है, उसे घटाना उतना ही मुश्किल लगता है। शरीर में जमा जिद्दी फैट, खासकर पेट के आसपास की चर्बी को कम करने के लिए व्यायाम बहुत जरूरी है। जब आप रोजाना 30 से 45 मिनट की कसरत करती हैं, तो शरीर की कैलोरी बर्न होती है और मेटाबॉलिज्म तेज होता है। यदि आप अपने कुल वजन का केवल 5 से 10 प्रतिशत वजन भी घटा लेती हैं, तो आपके पीरियड्स अपने आप नियमित होने लगते हैं।

हार्मोनल संतुलन और ओव्यूलेशन में सुधार

व्यायाम करने से शरीर के मुख्य हार्मोन्स जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का संतुलन सुधरता है। सही समय पर ओव्यूलेशन (अंडे का बनना और बाहर निकलना) न होना ही PCOS की सबसे बड़ी वजह है। नियमित योग, वॉक या हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से अंडाशय की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और हर महीने समय पर पीरियड आने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

तनाव और मूड स्विंग्स से राहत

PCOS से पीड़ित महिलाओं को अचानक बहुत ज्यादा गुस्सा आना, उदासी महसूस होना या मानसिक तनाव होना बहुत आम बात है। वर्कआउट करते समय हमारे दिमाग में ‘एंडोर्फिन’ और ‘सेरोटोनिन’ नाम के ‘हैप्पी हार्मोन्स’ रिलीज होते हैं। यह केमिकल मन को शांत रखते हैं, तनाव को दूर भगाते हैं और अच्छी नींद लाने में मदद करते हैं।

PCOD और PCOS में कौन सा व्यायाम है सबसे बेहतर?

PCOS में बहुत ज्यादा भारी या थका देने वाली कसरत करने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि बहुत अधिक दबाव से शरीर में कॉर्टिसोल यानी स्ट्रैस हार्मोन बढ़ सकता है।

हर दिन 30 से 40 मिनट तेज चाल से टहलना (ब्रिस्क वॉकिंग) बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा साइकिल चलाना, स्विमिंग या हल्का डांस भी किया जा सकता है। सूर्य नमस्कार, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, बद्धकोणासन (बटरफ्लाई पोज) और भुजंगासन जैसे योग आसन पेट के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं और ओवरी को स्वस्थ रखते हैं। हफ्ते में दो से तीन दिन हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या बॉडीवेट एक्सरसाइज करना भी मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

अगर आप रोजाना थोड़ी सी कसरत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेती हैं, तो PCOD और PCOS जैसी लाइफस्टाइल बीमारी को आसानी से मात देकर एक पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकती हैं।

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