आज की इस बेहद प्रतिस्पर्धी दुनिया में ‘ओवरथिंकिंग’ यानी हर बात पर जरूरत से ज्यादा सोचना एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। कोई पुरानी बात हो, भविष्य की चिंता हो, या फिर अपने करियर और काम को लेकर कोई उलझन, हमारा दिमाग लगातार विचारों के जाल में फंसा रहता है। कई बार हम उन चीजों के बारे में भी सोच-सोचकर परेशान होते रहते हैं, जो असल में कभी होने ही नहीं वाली हैं। किसी बात का विश्लेषण करना एक हद तक सही है, लेकिन जब वही विचार हमारे दिमाग में एक ही चक्रव्यूह की तरह घूमने लगें, तो वे हमारी कार्यक्षमता, निर्णय लेने की ताकत और रातों की नींद को पूरी तरह से बर्बाद कर देते हैं।
क्यों लगती है ओवरथिंकिंग की लत और इसका हमारे काम पर असर
ज्यादातर मामलों में ओवरथिंकिंग की शुरुआत तब होती है जब हम हर चीज को अपने हिसाब से परफेक्ट बनाना चाहते हैं या फिर हमारे मन में किसी काम के बिगड़ने का डर होता है। जब हम अपनी पढ़ाई, बिजनेस या रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे होते हैं, तो दिमाग में एक साथ कई योजनाएं चलती हैं। ऐसे में किसी एक काम पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, हमारा मन इस बात पर ज्यादा ध्यान देने लगता है कि ‘अगर ऐसा नहीं हुआ तो क्या होगा’। यह नकारात्मक सोच हमें अंदर से कमजोर बनाती है, जिससे हम वर्तमान में जीने के बजाय सिर्फ ख्यालों में ही खोए रह जाते हैं और हमारे जरूरी काम लटकते चले जाते हैं।
विचारों के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के आसान और व्यावहारिक तरीके*
इस मानसिक उलझन से बाहर निकलने का सबसे पहला कदम यह स्वीकार करना है कि दुनिया की हर चीज हमारे नियंत्रण में नहीं है। जब भी आपको महसूस हो कि आप किसी एक ही बात को बार-बार सोच रहे हैं, तो तुरंत अपने ध्यान को वहां से हटाकर किसी शारीरिक गतिविधि में लगा दें। आप अपने कमरे को व्यवस्थित कर सकते हैं, कोई पसंदीदा काम कर सकते हैं या बस कुछ देर के लिए गहरी सांसें ले सकते हैं। अपने विचारों को दिमाग में दबाकर रखने या उन पर लगातार सोचने से बेहतर है कि उन्हें एक डायरी में लिख लें। जब आप अपनी परेशानियों या योजनाओं को कागज पर उतार देते हैं, तो दिमाग को एक स्पष्टता मिलती है और फालतू का बोझ तुरंत कम हो जाता है।
वर्तमान में जीना सीखें और खुद को दें थोड़ा सा आराम
ओवरथिंकिंग को पूरी तरह खत्म करने के लिए खुद को आज में यानी वर्तमान पल में रखने का अभ्यास करें। बीते हुए कल को बदला नहीं जा सकता और आने वाले कल को सिर्फ सोचकर सुधारा नहीं जा सकता, इसलिए आज आप जो काम कर रहे हैं, उस पर अपना पूरा फोकस डालें। इसके साथ ही, खुद पर हर वक्त हर काम में परफेक्ट होने का दबाव बनाना छोड़ दें। गलतियां हर इंसान से होती हैं और वे हमें कुछ न कुछ सिखाकर ही जाती हैं। दिनभर की भागदौड़ के बाद रात को सोते समय अपने दिमाग को पूरी तरह शांत रखें, फोन को खुद से दूर करें और यह भरोसा रखें कि आपकी मेहनत का परिणाम सकारात्मक ही होगा।
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