बॉलीवुड में अक्सर फिल्मों के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाने की बातें होती हैं, लेकिन जब किसी फिल्म में महिला किरदार को ही गलत तरीके से पेश करने के आरोप लगते हैं, तो सवाल उठना लाजमी है। कुछ ऐसा ही विवाद साउथ फिल्म Peddi को लेकर देखने को मिला था। अब इस पूरे मामले पर एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने खुलकर बात की है और उनका बयान चर्चा में आ गया है।
जाह्नवी ने माना कि फिल्म में उनके किरदार को जिस तरह दिखाया गया, उस पर उन्हें पहले ही ज्यादा मजबूती से अपनी बात रखनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक कलाकार होने के नाते उनकी कुछ जिम्मेदारी बनती थी।
आखिर क्या था Peddi को लेकर विवाद?
राम चरण स्टारर फिल्म Peddi में जाह्नवी कपूर ने अचियम्मा नाम का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके किरदार के चित्रण को लेकर दर्शकों के एक वर्ग ने सवाल उठाए थे।
आलोचकों का कहना था कि कहानी में उनके किरदार को जरूरत से ज्यादा sexualise किया गया। इसके अलावा, कुछ दृश्यों और कहानी में दिखाए गए व्यवहार को लेकर भी आपत्तियां सामने आई थीं। आलोचना का एक अहम पहलू यह था कि फिल्म में कुछ परिस्थितियों को किस तरह पेश किया गया और उनका दर्शकों पर क्या असर पड़ सकता है।
विवाद बढ़ने के बाद निर्देशक बुची बाबू सना ने भी जाह्नवी के किरदार को लेकर माफी मांगी थी और फिल्म में बदलाव किए जाने की खबरें सामने आई थीं।
Koffee With Karan में जाह्नवी ने क्या कहा?
जाह्नवी कपूर ने इस मामले पर Koffee With Karan Season 9 में बात की, जहां वह वरुण धवन के साथ नजर आईं।
जाह्नवी ने स्वीकार किया कि फिल्म में उनके किरदार के चित्रण का समाज पर पड़ने वाला असर उन्हें परेशान करता है। उन्होंने यह भी माना कि वह अपने हिस्से की जिम्मेदारी से बचना नहीं चाहतीं।
एक्ट्रेस ने कहा कि वह चाहती थीं कि उन्होंने शूटिंग के दौरान ज्यादा सतर्कता दिखाई होती और कुछ चीजों पर अधिक मजबूती से सवाल उठाए होते।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फिल्म में उनके किरदार का चित्रण समस्याग्रस्त था और कहानी में यौन उत्पीड़न को जिस तरह प्रस्तुत किया गया, उस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत थी।
क्या सिर्फ एक्ट्रेस की जिम्मेदारी थी?
इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि किसी फिल्म में महिला किरदार को किस तरह दिखाया जाएगा, इसका फैसला सिर्फ एक एक्टर करता है या इसके पीछे पूरी टीम की भूमिका होती है?
फिल्म की कहानी, निर्देशन, कैमरा एंगल, एडिटिंग और फाइनल प्रेजेंटेशन, सभी मिलकर तय करते हैं कि दर्शकों के सामने कोई किरदार किस रूप में पहुंचेगा।
जाह्नवी ने भी अपने बयान में बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान कलाकारों को हर बार यह अंदाजा नहीं होता कि किसी सीन को आखिरकार किस तरह फिल्माया और प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने माना कि अपने विशेषाधिकार और इंडस्ट्री में अपनी स्थिति का इस्तेमाल करके वह ज्यादा मजबूती से अपनी चिंताएं सामने रख सकती थीं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि फिल्म की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ एक्ट्रेस पर डाल दी जाए। निर्देशक, लेखक और प्रोडक्शन से जुड़े लोगों की भी भूमिका होती है।
इस बयान से क्या बदलेगा?
जाह्नवी का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने आलोचना को पूरी तरह खारिज करने के बजाय अपनी भूमिका पर सवाल उठाया है।
लेकिन किसी विवाद के बाद गलती स्वीकार करना और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए कदम उठाना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
फिल्म इंडस्ट्री में महिला कलाकारों के किरदारों को लेकर पहले भी कई बार बहस हो चुकी है। ऐसे में जरूरी है कि कलाकारों को शूटिंग के दौरान अपनी असहमति जाहिर करने की आजादी मिले और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।
निष्कर्ष: जाह्नवी कपूर का बयान एक जरूरी चर्चा को फिर सामने लाता है। फिल्मों में क्रिएटिव फ्रीडम महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सवाल भी उतना ही जरूरी है कि किसी कहानी को पर्दे पर उतारते समय महिलाओं को किस नजरिए से दिखाया जा रहा है। अब देखना होगा कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित रहता है या फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के तरीकों पर भी इसका असर पड़ता है।
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