that era

वो ज़माना

न रहा वो फूलों का खिलना न रहा उसका खिड़की पर आना न रहा वो नुक्कड़ में मिलना न रहा वो मौसम आशिक़ाना न रहा मिलके आगन में गाना न रहा वो दोस्तों का ठिकाना न रहा वो खेला गलियों Read more

journey of the year 2021

बीता वर्ष 2021

वक्त का पंछी उड़ता ही जाए गुजरे लम्हों की याद दिलाए बीत गया ये साल कुछ ऐसे पलक यूँ ही झपकी हो जैसे कुछ फिसली ज़िंदगी हाथों से कुछ मन बहला उनकी बातों से कुछ फूल गिरे बंजर शाख़ों से Read more

insan ki zuban

ज़ुबान

इंसान की ज़ुबान भी कैसी अनिष्ट व अजीब शय है मीठी तो स्वर्ग,कड़वी तो सौ फ़ी सदी नर्क तय है ये बेहद लचीली , बदमिज़ाज और ख़ुराफ़ाती है ग़लत राह चले तो रिश्तों में दूरियाँ बड़ा जाती है जब भी Read more