New Delhi: छात्रों की सुरक्षा और अवैध निर्माण के मुद्दे को लेकर CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सरकार के सामने सात सूत्रीय मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि मामले की जांच केवल किसी एक इमारत के मालिक तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन व्यापक संबंधों और कथित नेटवर्क की भी पड़ताल होनी चाहिए, जिनकी वजह से अवैध निर्माण और असुरक्षित गतिविधियां लंबे समय तक जारी रहती हैं। उन्होंने ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करने और व्यवस्था में मौजूद खामियों को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया।
सिर्फ मालिक नहीं, पूरे कथित नेटवर्क की हो स्वतंत्र आपराधिक जांच
CJP की पहली मांग मामले में एक स्वतंत्र आपराधिक जांच की है। सौरव दास के मुताबिक, जांच का दायरा केवल संबंधित संपत्ति के मालिक तक सीमित न रहकर उन लोगों और प्रभावशाली नेटवर्क तक पहुंचना चाहिए, जिन पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं। संगठन ने कथित ‘PG माफिया’ और राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण के पहलू की भी जांच किए जाने की मांग की है, ताकि यह सामने आ सके कि नियमों का उल्लंघन आखिर किसकी मिलीभगत या लापरवाही से संभव हुआ।
स्कूल, कॉलेज और छात्र आवासों का हो समयबद्ध स्ट्रक्चरल ऑडिट
दूसरी बड़ी मांग देशभर में छात्रों से जुड़े परिसरों और आवासों की सुरक्षा जांच को लेकर है। CJP ने स्कूलों, कॉलेजों और छात्र आवासों में समयबद्ध और इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जहां बड़ी संख्या में छात्र रहते या पढ़ते हैं, वहां भवन सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है।
अवैध इमारतों पर तत्काल कार्रवाई और सार्वजनिक डेटाबेस की मांग
CJP ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली अवैध और अनधिकृत इमारतों को तत्काल सील करने की मांग भी रखी है। इसके साथ ही छात्रों और अभिभावकों के लिए एक सार्वजनिक और आसानी से खोजे जा सकने वाले डेटाबेस की मांग की गई है, जिसमें PG और छात्र आवासों की कानूनी स्थिति तथा सुरक्षा अनुपालन की जानकारी उपलब्ध हो। संगठन का तर्क है कि इससे छात्रों को रहने की जगह चुनने से पहले यह पता चल सकेगा कि संबंधित परिसर नियमों के अनुरूप है या नहीं।
सरकारी हॉस्टल बढ़ाने और पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद देने की मांग
CJP ने छात्र आवासों की कमी को भी इस पूरे संकट का अहम हिस्सा बताया है। संगठन की मांग है कि सरकार तय समयसीमा के भीतर अधिक संख्या में सरकारी छात्रावासों का निर्माण कराए, ताकि छात्रों को असुरक्षित या अनधिकृत निजी आवासों पर निर्भर न रहना पड़े। इसके अलावा मृतकों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये और घायल पीड़ितों के लिए 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की मांग की गई है।
मंत्री और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
CJP ने शहरी विकास और नियोजन से जुड़े अधिकारियों तथा मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठाई है। सौरव दास ने सवाल किया कि यदि सुरक्षा नियम मौजूद हैं, तो उनके प्रभावी क्रियान्वयन में विफलता की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। इसी क्रम में मंत्री आशीष सूद की जवाबदेही तय किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन का कहना है कि छात्रों की जान जाने के बाद केवल निचले स्तर के अधिकारियों या संपत्ति मालिकों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होनी चाहिए, बल्कि उस प्रशासनिक व्यवस्था की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए जो नियमों के पालन की निगरानी करती है।
‘छात्रों की जान व्यवस्था की विफलता की कीमत क्यों बने?’
इस पूरे मामले ने शासन, प्रशासन और छात्र सुरक्षा की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। CJP का सवाल है कि भ्रष्टाचार, लापरवाही या कथित राजनीतिक संरक्षण की कीमत छात्रों को अपनी जान देकर क्यों चुकानी पड़े? संगठन ने इसे 2026 के भारत के लिए शर्मनाक स्थिति बताते हुए कहा कि देश के छात्रों और उनके परिवारों को इससे कहीं बेहतर और सुरक्षित व्यवस्था मिलनी चाहिए। हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए संगठन ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की है।
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Ms. Pooja, |
