नेपाल में आई भयानक बाढ़ ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। कई दिनों से जारी राहत और बचाव अभियान के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में करीब 797 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
सबसे चिंता वाली बात ये है कि कई लोग ऐसी जगहों पर फंसे हुए हैं, जहां राहत टीमों के लिए पहुंचना बेहद मुश्किल हो रहा है। कुछ लोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे हैं और उन्हें बाहर निकालने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है।
रेस्क्यू टीमों के सामने सिर्फ मलबा और पानी ही चुनौती नहीं है। नदियों का बढ़ता जलस्तर और लगातार बदलते हालात बचाव अभियान को और मुश्किल बना रहे हैं। इसके बावजूद टीमें उन जगहों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जहां लोगों के जिंदा होने की उम्मीद अभी बाकी है।
नेपाल के कई परिवारों के लिए ये वक्त शायद जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर है। किसी को अपने परिवार के सदस्य की तलाश है, किसी को घर की चिंता है और किसी को ये इंतजार है कि शायद अगली खबर उनके अपनों के सुरक्षित होने की हो।
इस आपदा में कई विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सैकड़ों विदेशी नागरिकों समेत हजारों लोगों के बारे में अभी तक पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। भारत समेत कई देशों ने नेपाल की मदद के लिए राहत और बचाव प्रयासों में सहयोग दिया है।
नेपाल में कुछ जगहों पर हालात इतने खराब हैं कि शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। अधिकारियों ने पहचान के लिए DNA सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि परिवारों को कम से कम ये पता चल सके कि उनके अपनों के साथ क्या हुआ।
लेकिन इस पूरी त्रासदी के बीच उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है। सुरंगों में फंसे लोगों तक हवा पहुंचाने और उन्हें बाहर निकालने की कोशिशें जारी हैं। हर गुजरता घंटा रेस्क्यू टीमों के लिए चुनौती बढ़ा रहा है, लेकिन परिवारों के लिए वही हर घंटा एक उम्मीद भी लेकर आ रहा है।
अभी नेपाल के सामने सबसे बड़ा सवाल सिर्फ नुकसान का आंकड़ा नहीं है। सवाल ये है कि जो लोग अब भी कहीं फंसे हैं, क्या उन्हें समय रहते बाहर निकाला जा सकेगा? फिलहाल बचाव अभियान इसी उम्मीद के साथ जारी है।
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