राहुल गांधी ने पुणे में मनुस्मृति का जिक्र करते हुए कहा था कि इसमें महिलाओं को हमेशा पुरुषों के अधीन रखने की बात कही गई है। उनके अनुसार ग्रंथ कहता है कि स्त्री बचपन में पिता, जवानी में पति और बुढ़ापे में बेटे के अधीन रहती है और उसे कभी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए। राहुल गांधी का यह बयान पूरी तरह सही है, क्योंकि मनुस्मृति के मूल पाठ में यह बात बिल्कुल ऐसे ही दर्ज है।
मनुस्मृति के अध्याय 9 के श्लोक 3 और अध्याय 5 के श्लोक 148 में साफ लिखा है कि पिता बचपन में रक्षा करता है, पति युवावस्था में रक्षा करता है और पुत्र वृद्धावस्था में रक्षा करता है, इसलिए स्त्री कभी स्वतंत्रता के योग्य नहीं है। इसके अलावा अध्याय 5 के श्लोक 147 में यह भी लिखा है कि किसी भी स्त्री को अपने घर में भी कोई काम स्वतंत्र रूप से नहीं करना चाहिए।
हालांकि इसी ग्रंथ के अध्याय 3 श्लोक 56 में यह भी लिखा है कि जहां नारियों का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं। इस तरह मनुस्मृति में महिलाओं को लेकर दो विरोधी विचार मिलते हैं, लेकिन राहुल गांधी ने जिस श्लोक का हवाला दिया, वह ग्रंथ में ज्यों का त्यों मौजूद है। डॉ. बी.आर. आंबेडकर समेत कई विचारकों ने भी इसी आधार पर मनुस्मृति की आलोचना की थी। आज भारत का संविधान इन प्राचीन विचारों को खारिज कर महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार और पूर्ण स्वतंत्रता देता है।
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