हताश, निराश और व्यवस्था के नाकारापन से नाराज हॉकी कोच और जानी मानी पूर्व कप्तान असंता लकड़ा ने थक हार कर अब महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया है l उसे ऐसा इसलिए करना पड़ रहा है क्योंकि “बालिका बचाओ, बालिका पढ़ाओ और बालिका खिलाओ” का नारा देने वाली देश की सरकार, खेल मंत्रालय और ओड़िसा सरकार महिलाओं को हैरान परेशान करने वाले असामाजिक तत्व के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाही करने में नाकाम रही हैं l असंता झाड़खंड की महिला खिलाड़ियों के यौन शोषण के विरुद्ध हर स्तर पर गुहार लगा चुकी है लेकिन देश और प्रदेश की गूंगी बहरी सरकारों ने फिलहाल कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया है?
बेशक़, महिला हॉकी खिलाड़ियों के निशाने पर अब हॉकी इंडिया का महासचिव भोला नाथ है, जिसके विरुद्ध लगभग सभीं प्लेटफॉर्म पर आवाज़ बुलंद कर चुकी हैं लेकिन कोई सुनवाई क्यों नहीं हो रही? देखना यह होगा कि महिला आयोग कब और कैसा कदम उठाता है l लेकिन सच्चाई यह है कि महिला हॉकी की पड़ताड़ितों को कहीं से भी न्याय मिलने की सम्भावना नहीं है क्योंकि हर शाख पर उल्लू बैठे हैं l
भारतीय खेलों का पिछला रिकॉर्ड उठा कर देखें तो महिला खिलाड़ियों से हर दौर में फेडरेशन अधिकारियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ द्वारा अश्लील हरकतें की जाती रही हैं l हर दौर में महिलाओं ने विरोध किया, आवाज उठाई लेकिन अपराधी साफ बच कर निकल गए l इस पत्रकार ने देश की लगभग दो दर्ज़न महिला खिलाड़ियों से उनकी पीड़ा के बारे में पूछा तो ज्यादातर ने अनमने मन से अश्लीन हरकतों को लेकर इंकार कर दिया लेकिन यह माना कि उनके साथ कि कुछ खिलाड़ियों को पड़ताड़ना सहनी पड़ी है l क्योंकि शिकायत करने पर कोई कार्यवाही नहीं होती, बदनामी अलग से होती है इसलिए ज्यादातर खिलाड़ी चुपचाप सह जाती हैं या समय से पहले खेल विमुख हो जाती हैंl
सच्चाई यह है कि महिला खिलाड़ियों के साथ व्यभिचार की घटनाएं आम हैं l खेल मंत्रालय और अन्य जिम्मेदार विभागों के पास शिकायतों का ताँता लगा है लेकिन मजबूत पकड़ वाले अधिकारियों का बाल भी बांका नहीं होता l असंता ने जिस कोच का नाम लिया वह सफाई देता फिर रहा है लेकिन सचिव भोला नाथ के कद से हॉकी इंडिया का अध्यक्ष दिलीप टिर्की भी डरता है l चुप बैठा है l देखते हैं महिला आयोग हिम्मत दिखाता है या यहाँ भी न्याय नहीं मिलता l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
