फुटबाल इतिहास में एक से एक बढ़ कर महान खिलाड़ी हुए लेकिन जिस खिलाड़ी ने बिना विश्व विजेता बने सर्वाधिक सुर्खियां चुराई, सबसे ज्यादा मान सम्मान और शायद आलोचना भी पाई, जिसने लंबे समय तक फुटबाल जगत को रोमांचित किया, नाम, सम्मान और पैसा कमाया वह और कोई नहीं क्रिस्टियानो रोनाल्डो है, जोकि अपना अंतिम फीफा कप खेल कर बिना ट्रॉफी लिए फुटबाल को अलविदा कहने जा रहा है l सालों से यह चर्चा जारी है कि रोनाल्डो और मेस्सी में कौन बेहतर है और इस धरती पर अब तक जन्मा कौनसा खिलाड़ी सर्वश्रेष्ठ है l भले ही रोनाल्डो का अंतर्राष्ट्रीय करियर लगभग समाप्त हो चुका है और उसके द्वारा स्थापित अनेकों रिकॉर्ड भी तोड़े जाएंगे, क्योंकि रिकॉर्ड बनते ही टूटने के लिए है l लेकिन अन्य महांन खिलाड़ियों की तुलना में रोनाल्डो कुछ अलग, कुछ हटकर और कुछ कुछ फुटबाल के भगवान् जैसा नज़र आता है ऐसा क्यों?
इसलिए जिस फुटबाल ने उसे महान बनाया उस खेल को पुर्तगाल के लाडले और फुटबाल के सपूत ने ऐसा बहुत कुछ दिया है, जिसकी चर्चा युगों युगों तक की जाएगी l बेशक यह बार बार कहा जाएगा कि वह वर्ल्ड कप नहीं जीत पाया लेकिन उसकी मेहनत, हिम्मत, इच्छा शक्ति, टीम भावना, कड़े अनुशासन और देश के लिए मर मिटने वाला जज्बा हमेशा चर्चा में रहेंगे l आने वाली पीढियाँ उसे सिर्फ इसलिए याद नहीं करेंगी क्योंकि उसने मेस्सी के साथ प्रतिद्वन्दविता की, टक्कर दी लेकिन वर्ल्ड कप में गोलों की संख्या नहीं बढ़ा पाया l उसे गोलों की संख्या से नहीं बल्कि इसलिए जाना जाएगा कि मेहनत, अट्टू विश्वास और अनुशासन से कुछ भी पाया जा सकता है l उसने सिर्फ सपने नहीं देखे l उन्हें पूरा करने के लिए दिन रात पसीना बहाया l
सच तो यह है कि भारतीय फुटबाल यदि आगे बढ़ना चाहती है तो देश की फुटबाल फेडरेशन, पदाधिकारियों, कोचों और खिलाड़ियों को रोनाल्डो के चरित्र, उसकी मेहनत, इच्छा शक्ति, दृढ निश्चय और देश और टीम भक्ति एवम भावना से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा l क्लब और देश के लिए कैसे जान लड़ाई जाती है उसने 41 साल कि उम्र में भी दिखा दिया l दुनियाभर की क्लब फुटबाल में उसने गोलों का अम्बार लगाया, नाम और पैसा कमाया लेकिन कभी भी स्वार्थी खिलाड़ी नहीं बना l यह बात अलग है कि वह गोल ज़माने का भूखा था और ताउम्र गोलों कि बरसात करता रहा l
बेशक, भारत के तमाम खिलाड़ियों और खासकर फुटबालर के लिए वह एक साफ सुथरा और पवित्र आईना हैl भारतीय खेल आका और खिलाड़ी चाहें तो उस आईने में अपनी रोनी शक्ल सूरत के दर्शन कर सकते है l विदेशी कोच, खिलाड़ियों और विदेधी तकनीक की वकालात करने वाले देश के फुटबाल आका रोनाल्डो के गरीब और दींन हीन बचपन, साधन सुविधाओं की कमी, परिवार के त्याग, तपस्या और कड़ी मेहनत से सबक ले सकते है l बेशक़, फुटबाल ने उसे महांन बनाया, धन वैभव दिया, मालामाल किया लेकिन रोनाल्डो नाम के आईने में हम अपनी शक्ल देख सकते है और जन सकते है कि वह अपने आप में एक अलग संस्कृति है, महान इतिहास है, जिसे बार बार पढ़ने और जीवन में गढ़ने की जरुरत है l
चलते चलते एक एक बात और – कौन जानता था कि सऊदी में भी कोई प्रो लीग होती है? लेकिन रोनाल्डो के कदम पड़ते ही दुनियाभर के महान खिलाड़ी सऊदी लीग में टूट पड़े l लाखों करोड़ों डालर कमाने लगे l खुद रोनाल्डो को खाली चेक पकड़ाया गया और अल नसर ने कह दिया कि रकम खुद भर लें l क्या ऐसा महान खिलाड़ी कोई दूसरा हुआ है? आज वही खिलाडी उम्र के उस पड़ाव पर खड़ा है जहाँ से सीधे हिमालय की बर्फीली चोटियों में तप के लिए जा सकता है या कुछ और खेल कर अपने चाहने वालों को रोमांचित कर सकता है l लेकिन इतना तय है कि फुटबाल इतिहास उसकी महानता के बखान किए बिना अधूरा रहेगा l वह अपनी किस्म का अनोखा खिलाड़ी है और मैदान और मैदान के बाहर बाहर फुटबाल का सच्चा सपूत बना रहा l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
