फीफा वर्ल्ड की शुरुआत के साथ ही दुनिया भर के फुटबाल प्रेमियों, खिलाड़ियों और खेल के जानकारों के बीच अटकलबाजियों का बाजार गर्म हो गया हैl जैसे जैसे मुकाबले आगे बढ़ रहे हैं प्रिंट मीडिया बहुत सटीक और ज्ञानवर्धक जानकारियां बाँट रहा है l लेकिन सोशल मीडिया और वीडियो गेम खेलने वाले अज्ञानी, नालायक, और अनपढ़ गँवार भारतीय फुटबाल प्रेमियों को ठीक वैसा ही ज्ञान दे रहे हैं जैसी भारतीय फुटबाल की हालत है l हालांकि फीफा ने अपनी एक रिपोर्ट में भारतीय फुटबाल प्रेमियों की प्रशंसा की है और माना है कि भारत में फुटबाल को चाहने वाले अन्य देशों की तुलना में कमतर नहीं हैं l लेकिन भारतीय फुटबाल के स्तर को लेकर फीफा बेहद नाराज भी है l
जहाँ तक देश की फुटबाल को संचालित करने वाली फेडरेशन की बात है तो उसके क्रिया कलापों को लेकर पिछले पचास सालों से नाखुशी और आलोचना का बाजार गर्म है l खासकर दास मुंशी के अध्यक्ष बनने, प्रफुल पटेल के सत्ता सँभालने और अंततः कल्याण चौबे के सतासीन होने के बाद से अधिकारियों का भ्र्ष्टाचार बढ़ा और उतनी ही तेजी से खेल के स्तर में गिरावट देखी गई है l फीफा रैकिंग में भी हम लगातार गिरते चले गए l कुछ पूर्व खिलाड़ियों और एक्सपर्टस के अनुसार स्कूल, कॉलेज, आयु वर्ग के आयोजनों, राष्ट्रीय चैंपियनशिप, आई लीग, आईएसएल और तमाम आयोजनों पर सरसरी नज़र डालें तो भारतीय फुटबाल में कुछ भी ऐसा नहीं चल रहा जिसे खेल के लिए उत्साहवर्धक और प्रगतिशील कहा जा सके l
स्कूल और कॉलेज की फुटबाल पूरी तरह पंचर है तो ऊपर के स्तर पर जो खिलाड़ी पहुँच रहे हैं या पहुँचाए जा रहे हैं उनमें दम नहीं है क्योंकि ज्यादातर की बुनियाद एज फ्रॉड और अन्य खामियों पर खड़ी है l
दुनिया के सबसे बड़े खेल मेले के चलते अपनी फुटबाल को कोसने का इसलिए मन किया है क्योंकि फीफा कप मे हमारी भागीदारी मैदान के बाहर से ही बढ़ चढ़ कर रही है l पिछले कई दशकों से हमारे फुटबाल प्रेमी और पूर्व खिलाड़ी सुधार के लिए चीख चिल्ला रहे हैं लेकिन घटिया मानसिकता वाले कोच, कच्ची बुनियाद वाले खिलाड़ी और कमजोर सोच वाली भ्रष्ट फेडरेशन से कुछ करते नहीं बन पा रहा l कुछ जानकारों की मानें तो फिक्सिंग और सट्टेबाजी जैसी बीमारियां भारतीय फुटबाल में गहराई तक घुसपैठ कर चुकी हैं l यहाँ तक कहा जा रहा है कि फेडरेशन सबकुछ जानते हुए भी अनजान बनी हुई है l तो फिर आप ही बताएं कि हमारी फुटबाल कैसे आगे बढ़ेगी? कैसे हम फुटबाल जगत में सम्मान पा सकते हैं? यही मौका है कि वर्ल्ड कप के चलते देश की सरकार, खेल मंत्रालय, फेडरेशन, राष्ट्रीय और राज्य इकाईयां पूर्व खिलाड़ियों के साथ मिल बैठ कर कुछ ठोस करें, दीर्घाकालीन योजना बनाएँ और भारतीय फुटबाल को सही दिशा देने के लिए ईमानदार प्रयास करें l हालांकि ऐसा कुछ होने वाला नहीं है क्योंकि हर वर्ल्ड कप से चलते हम अपनी फुटबाल को कोसते हैं, गालियां देते हैं और फिर सब कुछ भूल जाते हैं l चार साल बाद जब नींद टूटती है तो फिर वही घिसी पिटी, निर्लज फुटबाल बुरी सी सूरत लेकर 150 करोड़ की भावनाओं से खेलती दिखाई देती है l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
