उत्तर और मध्य भारत बना भट्ठी: दिल्ली यूपी और एमपी में अगले सात दिन आसमान से बरसेगी आग

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उत्तर और मध्य भारत इस समय भीषण गर्मी की सबसे खतरनाक मार झेल रहा है। देश की राजधानी दिल्ली उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के तमाम इलाके सूरज की सीधी तपिश के कारण भट्ठी की तरह तप रहे हैं। मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए लू का ऑरेंज अलर्ट जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले सात दिनों तक इस जानलेवा गर्मी से राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं और आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में पारा 47 डिग्री सेल्सियस के भी पार पहुंच सकता है।

दिल्ली और यूपी में रिकॉर्ड तोड़ती गर्मी और लू का कहर

राजधानी दिल्ली में गर्मी ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को खतरे में डाल दिया है। दिल्ली के नज़दीकी इलाकों और मौसम केंद्रों पर तापमान 46 डिग्री को पार कर चुका है और आज इसके 47 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं उत्तर प्रदेश के हालात और भी ज़्यादा खराब हैं जहां बांदा और झांसी जैसे बुंदेलखंड के इलाकों में पारा 48 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। दोपहर के समय चलने वाली तेज़ और शुष्क हवाओं ने लोगों का घरों से निकलना पूरी तरह बंद कर दिया है। सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग इस झुलसाने वाली धूप से बचने के लिए हर संभव उपाय कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश में भी पारे का टॉर्चर और खजुराहो सबसे गर्म

सिर्फ दिल्ली और यूपी ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश भी इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है। मध्य प्रदेश का पर्यटन स्थल खजुराहो इस समय राज्य का सबसे गर्म इलाका बन चुका है जहां तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। इसके अलावा ग्वालियर सागर और दतिया जैसे उत्तरी मध्य प्रदेश के जिलों में भी सूर्यदेव का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। दिन का तापमान सामान्य से तीन से चार डिग्री ऊपर चल रहा है जिससे इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी पानी और छांव के लिए बेहाल नजर आ रहे हैं।

आखिर क्यों अचानक इतनी बढ़ गई है गर्मी और क्या है मुख्य वजह

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस अचानक बढ़ी भीषण गर्मी के पीछे सबसे बड़ा कारण राजस्थान के थार मरुस्थल और पाकिस्तान के शुष्क इलाकों से आने वाली गर्म उत्तर-पश्चिमी हवाएं हैं। ये हवाएं बेहद सूखी और गर्म होती हैं जो अपने साथ भारी मात्रा में तपिश लेकर आती हैं। दूसरा बड़ा कारण यह है कि इस बार मई के महीने में पहाड़ों पर कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय नहीं हुआ जिसके चलते मैदानी इलाकों में बारिश या आंधी नहीं आई। आसमान पूरी तरह साफ होने के कारण सूरज की किरणें सीधे धरती को तपा रही हैं जिससे कंक्रीट के जंगल बन चुके शहर इस गर्मी को सोखकर रात में भी वातावरण को ठंडा नहीं होने दे रहे हैं।

दिन ही नहीं अब रातें भी हुईं गर्म और बिजली की मांग ने बनाया रिकॉर्ड

इस बार की गर्मी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि रात के समय भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। दिल्ली और भोपाल जैसे शहरों में न्यूनतम तापमान यानी रात का तापमान भी 28 से 30 डिग्री के आसपास दर्ज किया जा रहा है जिसे मौसम विभाग ‘वार्म नाइट’ यानी गर्म रात की स्थिति कहता है। दिन भर तप चुकी जमीन रात को भी पूरी तरह ठंडी नहीं हो पा रही है। इस चौबीस घंटे की गर्मी के कारण घरों और दफ्तरों में एसी तथा कूलर लगातार चल रहे हैं जिससे देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड 260 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है जो अब तक के इतिहास में सबसे ज़्यादा है। सरकार ने अस्पतालों को हीटस्ट्रोक के मरीजों के लिए विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।

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