ओलंपिक मेजबानी बस सपना भर है!

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पिछले दिनों एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा ) के प्रमुझ विटोल्ड बांका की भारत यात्रा और खेल मंत्रालय, साई और अन्य शीर्ष पदाधिकारियों से उनकी बातचीत के बाद देश के खेल हलकों में गलत बयानी का दौर शुरू हो गया है l कहानी को घुमा फिरा कर पेश किया जा रहा है और यह प्रचारित किया जा रहा है कि वाडा ने मामले को हलके में लिया है l ऐसे जैसे कि किसी शरारती बच्चे को कान पकड़ने के लिए कहा जाए और आइंदा ऐसी हरकत ना करने के लिए पुचकारा जाए l

लेकिन सच्चाई यह है कि भारत में खेलों में बढ़ती नशाखोरी ना सिर्फ देश का सम्मान गिरा रही है अपितु भविष्य में भारत की अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी पर सवालिया निशान भी खड़ा कर रही हैl उल्लेखनीय है कि भारत को राष्ट्रमण्डल खेलों की मेजबानी के लिए हरि झंडी मिल गई है l उत्साहित भारत सरकार अब ओलम्पिक मेजबानी के लिए दम भर रही हैंl लेकिन ऐसा संभव होता नज़र नहीं आ रहा l इसलिए क्योंकि भारत ना सिर्फ एक फिसड्डी खेल राष्ट्र बन कर रह गया है, जोकि अब नशीली और प्रतिबंधित दवाओं के दम पर दम भर रहा है l हजारों खिलाड़ी सालों से ड्रग्स ले रहे हैँ, पकड़े जा रहे हैँ और देश का नाम ख़राब कर रहे हैँ लेकिन खेल संघो, आईओए और खेल मंत्रालय को खबर तक नहीं है l

खैर, देर से ही सही देश के खेल मंत्री ने नशाखोर खिलाड़ियों और भ्रष्ट खेल संघो को संभल जाने का अल्टीमेटम दे दिया है l वरना कुछ भी हो सकता है l भारत की अंतर्राष्ट्रीय खेल भागीदारी प्रभावित हो सकती है l इतना ही नहीं ओलम्पिक मेजबानी का ख्वाब देख रही सरकार और आईओ ए को टका सा जवाब भी मिल सकता है l कुछ पूर्व ओलम्पियानों की मानें तो वाडा कभी भी भारत के विरुद्ध फरमान जारी कर कोई बुरी खबर सुना सकता है l ऐसी खबर जोकि ओलम्पिक मेजबानी के दावे पर भारी पड़ सकती है l वैसे भी अमेरिका, चीन और रूस के साथ बिगड़े संबंधों के बाद ओलम्पिक मेजबानी का दावा करना मूर्खता होगी l

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
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