महामुकाबले का महापरिणाम: बंगाल और तमिलनाडु में मतदान की सुनामी ने रचा नया इतिहास

Voting

भारतीय लोकतंत्र के लिए कल का दिन किसी उत्सव से कम नहीं था। पश्चिम बंगाल के पहले चरण और तमिलनाडु की सभी सीटों पर हुए मतदान ने दुनिया को हैरान कर दिया है। जहाँ बंगाल के लोगों ने 92.14% वोटिंग करके यह दिखा दिया कि वे अपनी सरकार चुनने के लिए कितने संकल्पित हैं वहीं तमिलनाडु में 84.98% मतदान ने राज्य के पुराने सारे रिकॉर्ड मिट्टी में मिला दिए। चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने करियर में मतदाताओं का ऐसा सैलाब पहले कभी नहीं देखा था। लोग तपती धूप की परवाह किए बिना सुबह से ही लंबी लाइनों में खड़े नजर आए जिससे यह साफ हो गया कि इस बार का चुनाव परिणाम बेहद चौंकाने वाला होने वाला है।

बंगाल के पोलिंग बूथों पर उमड़ा जनसैलाब: हर जिले में दिखी रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी

पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर हुए पहले चरण के मतदान में मतदाताओं का जोश सातवें आसमान पर था। उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक हर उम्र के लोग लोकतंत्र के इस पर्व में शामिल हुए। बीरभूम और कूचबिहार जैसे क्षेत्रों में तो मतदान का प्रतिशत 93 को पार कर गया। इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजामों और चुनाव आयोग की सख्ती का असर यह हुआ कि लोग बिना किसी डर के घरों से बाहर निकले। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतना भारी मतदान हमेशा किसी बड़े बदलाव या बहुत बड़ी लहर की ओर इशारा करता है। बंगाल की सड़कों पर कल सिर्फ वोटरों का शोर था जो यह बताने के लिए काफी है कि वहाँ की जनता इस बार खामोश नहीं बैठने वाली।

तमिलनाडु में ‘थलापति’ की एंट्री और मतदान का तूफान

तमिलनाडु में इस बार की वोटिंग ने सबको इसलिए चौंकाया क्योंकि यहाँ दशकों पुराना रिकॉर्ड टूट गया है। 84.98% मतदान होना यह दर्शाता है कि राज्य की जनता मौजूदा राजनीति में कुछ नया देख रही है। इस बार के चुनाव में अभिनेता विजय की नई पार्टी के आने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया था जिसका सीधा असर वोटिंग प्रतिशत पर दिखा। युवाओं और महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। चेन्नई से लेकर कन्याकुमारी तक हर बूथ पर उत्सव जैसा माहौल था। सत्ताधारी और विपक्षी दलों के माथे पर अब चिंता की लकीरें हैं क्योंकि इतना भारी मतदान अक्सर स्थापित समीकरणों को बिगाड़ देता है।

तकनीक और सुरक्षा का संगम: शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ महापर्व

इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं को संभालना और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती थी। चुनाव आयोग ने इस बार हर बूथ पर सीसीटीवी कैमरों और वेबकास्टिंग का सहारा लिया जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो गई। बंगाल में केंद्रीय बलों की मुस्तैदी ने उपद्रवियों के हौसले पस्त कर दिए जिससे आम आदमी बिना किसी दबाव के अपनी पसंद का बटन दबा सका। ईवीएम पर फोटो और क्यूआर कोड जैसी नई सुविधाओं ने भी मतदाताओं का काम आसान कर दिया। अब सबकी नजरें ईवीएम के पिटारे पर टिकी हैं क्योंकि इन दो राज्यों के रुझान देश की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

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