New Delhi: वी.के. पाहुजा स्विमिंग स्टैटिस्टिकल बुलेटिन का 45वां संस्करण 23 जून 2025 को भव्य रूप से प्रकाशित हो चुका है। यह संस्करण तैराकी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और विश्वसनीय आंकड़ा संग्रह माना जाता है। इस संस्करण का संपादन प्रसिद्ध खेल शोधकर्ता डॉ. मीनाक्षी पाहुजा ने किया है, जिन्होंने वर्षों से तैराकी में भारतीय उपलब्धियों को संकलित करने का सराहनीय कार्य किया है। बुलेटिन में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैराकों की उपलब्धियों, रिकॉर्ड्स और ऐतिहासिक घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण दिया गया है।
विमोचन समारोह में डॉ. अरविंद लाल ने की सराहना
इस संस्करण का लोकार्पण पद्मश्री (मानद) से सम्मानित ब्रिगेडियर डॉ. अरविंद लाल द्वारा किया गया, जो लाल पैथ लैब्स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हैं। वे देश के प्रमुख लैबोरेटरी मेडिसिन विशेषज्ञों में से एक हैं। डॉ. लाल ने इस मौके पर कहा कि खेलों के प्रामाणिक दस्तावेज़ खेल संस्कृति को मजबूत करने में सहायक होते हैं और यह बुलेटिन तैराकी समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत साबित होगा। उनका मानना है कि खेल और स्वास्थ्य का संबंध गहरा है और दोनों क्षेत्रों का संगम समाज को नई दिशा देता है।
स्थान, समय और आयोजन की गरिमा
यह महत्वपूर्ण विमोचन समारोह 23 जून 2025 को Annex, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC), लोधी एस्टेट, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे हुई, जिसमें गणमान्य अतिथियों, खेल विशेषज्ञों और तैराकी से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया। आयोजन स्थल की गरिमा और व्यवस्थित संचालन ने इस अवसर को और भी विशेष बना दिया। इस संस्करण के माध्यम से तैराकी के क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक यात्रा और भविष्य की दिशा दोनों का अद्भुत प्रतिबिंब प्रस्तुत हुआ।
शुरुआत की प्रेरणा: एक समर्पित खेल सेवक की सोच से जन्मा बुलेटिन
वी.के. पाहुजा स्विमिंग स्टैटिस्टिकल बुलेटिन की नींव एक दूरदर्शी और समर्पित खेलसेवी श्री वीरेंद्र कुमार पाहुजा ने रखी थी। उनका जन्म 16 नवंबर 1945 को सिंध (तत्कालीन भारत) में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया, जहां उन्होंने तमाम कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा और खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने मॉडर्न स्कूल, बाराखंभा रोड से पढ़ाई की और राष्ट्रीय स्तर पर तैराकी व फुटबॉल में हिस्सा लिया, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वॉटर पोलो में देश का प्रतिनिधित्व किया। वे 1963 में एनआईएस पटियाला से दिल्ली के पहले प्रमाणित तैराकी कोच बने। बाद में उन्होंने शिक्षण को अपना कार्यक्षेत्र बनाया, लेकिन तैराकी से उनका गहरा जुड़ाव बना रहा।
एक ऐतिहासिक दस्तावेज की यात्रा: आंकड़ों से खिलाड़ियों की पहचान तक
खेलों में आंकड़ों के महत्व को समझते हुए श्री पाहुजा ने स्विमिंग स्टैटिस्टिकल बुलेटिन की शुरुआत की, जिसे आज भारतीय तैराकी की “बाइबिल” के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय तैराकों को प्रशिक्षित किया और एक तकनीकी अधिकारी एवं वॉटर पोलो रेफरी के रूप में देश का नाम रोशन किया। वे भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय वॉटर पोलो रेफरी बने और 1982 के एशियाई खेलों सहित कई विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में अपनी सेवाएं दीं। उनका यह बुलेटिन खिलाड़ियों, कोचों, खेल प्रशासकों, खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री है। आज इस ऐतिहासिक बुलेटिन की विरासत को उनकी बेटी डॉ. मीनाक्षी पाहुजा पूर्ण समर्पण और दक्षता के साथ आगे बढ़ा रही हैं।

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