“हमारा कुसूर क्या है? हम खेलना चाहते हैं लेकिन हमें खेलने नहीं दिया जा रहा l एआईएफएफ की करनी की सजा उसके समर्पित खिलाड़ियों को क्यों दी जा रही है?” इंडियन सुपर लीग टीमों के कप्तान और खिलाड़ियों ने भारतीय फुटबॉल को संचालित करने वाली शीर्ष संस्था से यह सवाल किया है कि खिलाड़ियों, टीमों और टीम प्रबंधन को फेडरेशन की नाकामियों की सजा क्यों दी जा रही है?
आई एस एल में भाग लेने वाली टीमों, उनके टीम प्रबंधन और प्रायोजकों ने ताज़ा सीजन में आ रहे व्यवधान को लेकर नाराजी व्यक्त की है l क्योंकि इस बार कोई बिडर नहीं मिला इसलिए आयोजन खटाई में पड़ गया है l नतीजन दुनियाभर में भारतीय फुटबाल की थू थू हो रही है l क्योंकि लीग को कमर्शियल राइट्स के लिए कोई धनाढय नहीं मिला इसलिए टीमों और खिलाड़ियों का बेचैन होना स्वाभाविक है l लाखों – करोड़ों पाने वाले खिलाड़ी व्याकुल हैं, उन्हें अपना भविष्य आधर में नज़र आता है l उनके सपने थम गए हैं l लेकिन राष्ट्रीय टीम के शर्मनाक प्रदर्शन और भारतीय फुटबाल की गिरती साख से क्षुब्ध फुटबाल प्रेमी ताज़ा हालात को ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहे l वे जानना चाहते हैं कि जब कभी किसी अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के लिए इन तथाकथित पेशेवर खिलाड़ियों की सेवा की जरुरत पड़ती है तो उनके क्लब देश के लिए खेलने नहीं देते या वे खेलना नहीं चाहते l खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में इसलिए नहीं खेलना चाहते क्योंकि चोटिल होने का खतरा रहता है l कई स्टार खिलाड़ी रो रहे हैं, गिड़गिड़ा रहे lहैं, उनकी कमाई पर फर्क पड़ता है l लेकिन देश में फुटबाल को पसंद करने वाले, पूजने वाले और बार बार अपनी टीम के शर्मनाक प्रदर्शन को झेलने वाले पूछ रहे हैं कि भारतीय फुटबाल की लगातार पराजयों, बार बार हारने और गिरते ग्राफ को लेकर उन्हें गुस्सा क्यों नहीं आता?
इस पत्रकार ने देश के दर्जन भर खिलाड़ियों और पूर्व चैंपियनों से आईएसएल के ताज़ा हालात के बारे में जानना चाहा तो ज्यादातर ने विवाद पर बात करने की जरुरत महसूस नहीं की l इसलिए क्यों कि उनमें से ज्यादातर यूरोप और लेटिन अमेरिकी फुटबाल देख रहे हैंl उन्हें आईएसएल जैसे आयोजनों से ऐलर्जी हो गई है l कुछ एक ने बस इतना ही कहा कि जो खिलाड़ी लाखों करोड़ों कमा रहे हैं लेकिन उनके खेलते भारतीय फुटबाल शर्मसार हो रही है तो वे अपनी परेशानी से भी खुद निपटेँ l उन्हें नहीं लगता कि आईएस एल के आयोजन से भारतीय फुटबाल को कोई फायदा हुआ है l ऐसे में यही बेहतर होगा कि देश के फुटबाल प्रेमी ताज़ा हालात से मुंह मोड़ लें l कुछ एक ने तो यह भी कहा कि वे विदेशी फुटबाल देख कर अपना गम गलत कर लेते हैं l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
