कुछ समय के लिए ही सही भारतीय फुटबाल सही ट्रैक पकड़ती नज़र आने लगी थी लेकिन सुनील क्षेत्री के मोह ने उसे शायद फिर से भटका दिया है l सालों बाद अपने घरेलू कोच खालिद जमील ने भारतीय फुटबाल में बदलाव का संकेत दिया लेकिन सुनील को फिर से वापस बुलाने का सीधा सा मतलब है कि कोच को अपनी फारवर्ड लाइन पर भरोसा नहीं है l यह ना भूलें कि बिना सुनील के भारत ने अपने से ऊँची रैकिंग की टीमों के विरुद्ध सधा हुआ प्रदर्शन किया l भले ही चार टीमों में तीसरा स्थान पाना कोई बड़ा तीर चलाना नहीं लेकिन जो भारत खेलना और जीतना भूल गया था उसके लिए संतोषजनक कहा जा सकता है l.
हालांकि खालिद जमील जादू की छड़ी लेकर मैदान में नहीं उतरा और ना ही वह रातों रात मरियल भारतीय फुटबाल में प्राण फूंक सकता हैl लेकिन नये और उभरते खिलाड़ियों को यह निर्णय रास नहीं आ रहा l कुछ पूर्व खिलाड़ियों को भी हैरानी है कि ठीक ठाक चलते चलते देसी कोच महाशय बैकफुट पर क्यों आ गए l लगता है नाकारा फुटबाल फेडरेशन शायद सुनील क्षेत्री के मोहपाश से बाहर नहीं निकलना चाहती, जोकि बेहद आत्मघाती फैसला है l एक वर्ग ऐसा है जोकि क्षेत्री को फारवर्ड लाइन को लीड करने की जिम्मेदारी सौपने का पक्षधर है l बेशक़, वह गोल करने में माहिर खिलाड़ी है लेकिन रोनाल्डो या मेस्सी कदापि नहीं है l उसे एएफसी एशियन कप में भाग लेने वाली टीम के साथ जोड़ा जा रहा है लेकिन जो खिलाड़ी क्षेत्री की विदाई के बाद अपना स्थान सुरक्षित देख रहे थे उन पर क्या बीतेगी? जरा सोचें और भारतीय फुटबाल को मज़ाक़ बनाना छोड़ दें l वरना आधा कदम आगे बढ़ने के बाद दस कदम पीछे हटने की नौबत आ सकती है l
एक पूर्व खिलाड़ी के अनुसार एक तरफ तो हम भविष्य की टीम तैयार कर रहे हैं, युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं लेकिन अचानक यू टर्न लेकर क्षेत्री को फिर से आमंत्रण देना उभरते खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ने वाला बताया जा रहा है l इसमें दो राय नहीं कि वह आज भी अग्रिम पंक्ति का बेजोड़ खिलाड़ी है लेकिन कब तक? कब हम भविष्य के खिलाड़ी तैयार कर पाएंगे? पिछले पचास सालों से स्वार्थ की फुटबाल खेली जा रही है l अब तो सुधर जाओ l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
