सुना है कि भारत में आजादी का अमृत काल शुरू हो चुका है। कब से यह तो ‘वही’ जाने लेकिन अमृत काल के चलते हमारे खिलाड़ी जहर क्यों पी रहे हैं? क्यों बेटियों के साथ शर्मनाक कृत्य हो रहे हैं और क्यों भारत के खिलाड़ी अमृत पान की बजाय विष पान कर रहे हैं?
अमृत काल के चलते भारत दुनिया का सबसे बड़ा नशैड़ी देश घोषित हो चुका है। एक के बाद एक अनेकों भारतीय खिलाड़ी नशीली दवाएं खाकर, इंजेक्शन ठुकवा कर महामानव बनने का जो कुप्रयास कर रहे हैं उसने दुनिया भर में राम-कृष्ण, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, गुरु नानक देव और शहीद-ए-आजम भगत सिंह ध्यानचंद और अब्दुल कलाम के देश को हंसी का पात्र बना दिया है। यदि यही आजादी का अमृत काल है तो बहुत बुरा वक्त चल रहा है। एक तरफ तो हमारे खेलों के मठाधीश दावा कर रहे हैं कि भारत खेल महाशक्ति बनने जा रहा है, देश में ओलम्पिक गेम्स के आयोजन की तैयारियां चल रही है लेकिन किस लिए? वह कैसा ओलम्पिक होगा जिसमें हमारे नशाखोर खिलाड़ी एक-एक कर ट्रैक पर गिर पड़ रहे होंगे? बदहवास होकर खेलों में भाग ले रहे होंगे!
देश के कुछ पूर्व चैम्पियनों, वरिष्ठ खिलाड़ियों और कोचों से पूछे तो उन्हें भारतीय खेलों का भविष्य धुंधला नजर आता है। हालांकि बहुत से लंपट, फर्जी और लुटेरी मानसिकता वाले अधिकारी और कोच यह कहते मिल जाएंगे कि युगों पहले का विश्व गुरु राष्ट्र फिर से अपनी पहचान पाने की दिशा में बढ़ रहा है और भारतीय खेल दुनिया के नक्शे पर छाने के लिए मचल रहे हैं। लेकिन ऐसा कुछ होता नजर नहीं आता। दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल में हम कहीं के नहीं रहे। एथलेटिक्स, तैराकी, जिम्नास्टिक, टेनिस, बैडमिंटन, मुक्केबाजी, कुश्ती आदि लोकप्रिय खेलों में ‘जीरो’ के आसपास ठिठक गए हैं। ले-देकर ‘डोप’ का भरोसा था, जो कि टूट चुका है क्योंकि 150 करोड़ की आबादी वाला विश्व गुरु ‘नशैड़ी’ घोषित कर दिया गया है।
कुल मिलाकर एक क्रिकेट बचा है, जिसे ओलम्पिक प्रवेश मिल गया है लेकिन चार-छह देशों के खेल में भी हम क्या कर पाएंगे, अगले ओलम्पिक में पता चल जाएगा। फिलहाल भारतीय खेल आकाओं को झूठ के बुने जाल से बाहर आना होगा। वर्ना, वह दिन दूर नहीं जब ओलम्पिक पदक पाना फिर से सपना बना जाएगा।
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
