भारतीय फुटबाल ने साबित कर दिया है कि फुटबाल की
दुनिया वाकई गोल है l इसलिए क्योंकि भारतीय फुटबाल ने जहाँ से अभियान शुरू किया था वहीं लुढ़कती नज़र आ रही है l फीफा रैकिंग में लगातार गिर रहे हैं और अब कोचिंग में खामियाँ बता कर नये कोच की तलाश में जुट गए हैं l यह सिलसिला पिछले कई दशकों से चल रहा है लेकिन पंचर फुटबाल है कि सुधरने का नाम ही नहीं लेती l बीमारी जड़ों को लगी है लेकिन ग्रासरूट फुटबाल पर किसी का ध्यान नहीं है l
पिछले कोच मोनोलो के इस्तीफे के बाद से नये कोच की तलाश जारी है l फेडरेशन की माने तो 170 कोचों ने टीम का कोच बनने के लिए आवेदन किये थे l सूत्रों की माने तो काट छांट के बाद अब तीन नाम दौड़ में रह गए हैं, जिनमे पहला नाम स्टीफन कांस्टेटाइन है l दूसरे भारतीय कोच खालिद जमिल हैं और तीसरे हैं स्टीफेन तारकोविच l कौन कोच बनेगा यह फेडरेशन को तय करना है l लेकिन यदि कांस्टेटाइन को फिर से दायत्व सौंपा जाता है तो फेडरेशन की जगहँसाई हो सकती है, क्योंकि श्रीमानजी पहले भी यह दायत्व निभा चुके हैं l जहां तक खालिद को कोच बनाने की बात है तो ए आई एफ एफ को ताना दिया जाएगा कि तमाम विदेशी कोचों के फ्लॉप होने के बाद लौट के बुद्धू घर को आ रहे हैं l दशकों बाद अपने कोच की याद आई है l तीसरे कोच तारकोविच हैं, जिनकी आजमाइश बाकी है l
हैरानी वाली बात यह है कि भारतीय टीम लगातार हार रही है और उसकी फीफा रैकिंग गिर रही है लेकिन फेडरेशन और उसके सलाहकारों ने शायद ही कभी समस्या की जड़ में घुसने की कोशिश की होगी l फीफा रैकिंग में हम 133 वें हैं और लगातार गिरने का सिलसिला जारी है l लेकिन क्या एकबार फिर कोच बदलने से हम जग जीत जाएंगे? जानकारों की माने तो देश कि फुटबाल को चलाने वाले पगला गए हैं l बौखलाहत में अनाप शनाप निर्णय ले रहे हैं l उन्हें समस्या की जड़ नजर नहीं आ रही l ग्रास रूट फुटबाल को सुधारने कि बजाय धूल में लट्ठ चला रहे हैं l नतीजा सामने है l फुटबाल जगत में भारत की थू थू हो रही है l लानत ऐसी फुटबाल को!
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
