राष्ट्रीय खेल विधेयक पर संसद की मुहर लग गई है l बस राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी है और देश के खेल एज फ़्रॉड, नशाखोरी, खेल संघो की दादागिरी, धांधली, महिला खिलाड़ियों के साथ हो रहे व्यविचार और तमाम भ्र्ष्टाचार से मुक्त हो जाएंगे l खेल मंत्री मनसुख मंडवीया तो यहाँ तक कर रहे हैं कि बिल के अस्तित्व में आने के बाद भारत खेल महाशक्ति बनने की दिशा में सरपट दौड़ पड़ेगा l लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह पूछा जा रहा है कि बात बात पर सरकार की टांग खींचने वाले विपक्ष ने दोनों सदनों में चुप्पी क्यों साधे रखी? बिल के पक्ष विपक्ष में उनके मुंह से दो शब्द तक नहीं निकले l विपक्ष का यह व्यवहार ना सिर्फ निंदनीय है अपितु खेल विरोधी भी कहा जाएगा l
बेशक़, खेल मंत्री बिल पास करवाने के बाद बात ही बात में हीरो बन गए हैं और ओलम्पिक से पहले राष्ट्रमण्डल खेल आयोजित करने का मन बना रहे हैं l जो पीटी उषा आइओए की अध्यक्ष रहते विरोधियों के निशाने पर थीं और बात ही बात में रो पड़ती थीं वे भी बिल पास होने पर सुर्खियां लूट रही हैं l हालांकि उषा कुछ माह पहले स्पोर्ट्स बिल पर बिलबिलाने लगी थीं l उषा ने बयान दिया था कि बिल पास होने से खेलों में सरकारी हस्तक्षेप बढेगा जोकि खिलाड़ियों के लिए हितकर नहीं रहेगाl लेकिन उषा जी एक सफल खिलाड़ी से चतुर राजनेता बन गई हैं या उनका भी कायाकल्प हो गया है और राज्यसभा सांसद राजनीति में भी पायोली एक्सप्रेस की तरह दौड़ने लगी हैं l तारीफ़ की बात यह है कि भारतीय फुटबाल का बंटाधार करने वाले और फुटबाल को जादू टोना और झाड़ फूँक करने वाले ओझाओं के भरोसे छोड़ने वाले प्रफुल पटेल साहब बिल पर ना नुकुर तो कर रहे हैं लेकिन खुल कर नहीं बोलते l
नये खेल बिल से देश के खिलाड़ियों का क्या भला होने जा रहा है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय खेलों के सामने समस्याओं का भण्डार है l उम्र कि धोखाधड़ी, खिलाड़ियों की नशाखोरी, महिला खिलाड़ियों के साथ दुष्कर्म, कोच- खिलाड़ियों के चयन में धांधली और कई अन्य कारण हैं जिनके चलते भारतीय खेल गर्त में धँसते जा रहे हैं l अब देखना यह होगा कि नया विधेयक देश के खेलों और खिलाड़ियों को कैसे खेल संघो के भ्रष्ट अधिकारियों से बचा पाता है!
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
