थाईलैंड के विरुद्ध दोस्ताना मुकाबले में हुई हार के बाद भारतीय फुटबॉल प्रेमी इतने नाराज हैं कि उन्होंने यहां तक कह डाला कि भारत में फुटबॉल खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। साथ ही वे उन चमचों से बेहद नाराज है, जो सालों से शर्मनाक प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ‘ब्लू टाइगर्स’ कहते हैं। कुछ फुटबॉल प्रेमी अपनी टीम के शर्मनाक प्रदर्शन से इतने खफा है कि उन्होंने छेत्री सहित पूरी टीम को प्रतिबंधित करने की मांग कर डाली है।
सोशल मीडिया और भारतीय फुटबॉल के विभिन्न ग्रुपों में फुटबॉल फेडरेशन, कोच और खिलाड़ियों को भद्दी गालियां दी जा रही है और साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि फेडरेशन को भंग कर दिया जाए तथा पूरी टीम को बदल कर स्कूली खिलाड़ियों को मैदान पर उतारा जाए, क्योंकि देश के तथाकथित टॉप खिलाड़ी पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रहे हैं।
फुटबॉल को प्यार करने वाले मांग कर रहे हैं कि भारत फुटबॉल खेलना छोड़ दे। इसलिए क्योंकि जिस खेल से देश शर्मसार हो रहा है उस पर पैसा और समय बर्बाद करने से कोई लाभ नहीं है। कल तक जो सुनील छेत्री स्टार खिलाड़ी कहा जा रहा था, उसे तुरंत टीम से बाहर करने की मांग की जा रही है। बांग्लादेश, नेपाल और कुछ अन्य पड़ोसी देशों के खिलाड़ी और फुटबॉल प्रेमी भारतीय फुटबॉल की खिल्ली उड़ा रहे हैं। उनके अनुसार, डेढ़ सौ करोड़ की आबादी वाले देश के पास एक भी स्तरीय खिलाड़ी नहीं है। उनके अनुसार, भारतीय फुटबॉल की मौत हो चुकी है और देश में एक भी अच्छा खिलाड़ी नहीं है। कोई कल्याण चौबे को धक्के मारकर फेंकने की बात कर रहा है तो दूसरा कहता है कि सुनील छेत्री अपना नाम खराब कर रहा है। एक नाराज फुटबॉल प्रेमी ने तो यहां तक कह डाला कि भारत उम्र की धोखाधड़ी वाली बूढ़ी और बीमार टीम को ढो रहा है। यदि अधिकारी बेशर्म हैं तो खिलाड़ियों को तो शर्म आनी चाहिए। उन्हें चुपचाप टीम से बाहर हो जाना चाहिए। कोई भी राष्ट्रीय टीम के लायक नहीं है।
फुटबॉल प्रेमियों का गुस्सा लगातार फुट रहा है और वे पूरी टीम को धक्के मार बाहर करने की मांग कर रहे हैं। उन्हें नहीं लगता है कि आने वाले सौ साल में भी हम स्तरीय प्रदर्शन कर पाएंगे।
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
