एशिया कप : चीर फाड़ जारी है!

Asia cup 2

एशिया कप जीतने के बाद देश में जहाँ एक तरफ पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर की तरह धुनने और उसे सबक सिखाने की बात की जा रही है तो एक बड़ा पक्ष (विपक्ष) पूछ रहा है कि यदि जीत पहलगाम के नरसंहार का बदला है तो क्या बेकूसूर देशवासियों की हत्या का बदला चुकता हो गया है? यदि खेल के एंगल से देखें तो भारत ने पाकिस्तान को चारों खाने चित दे मारा है l एक, दो नहीं, तीन बार उसे हैसियत का आईना दिखा कर अपनी श्रेष्ठता का परचम फहराया है l दूसरी तरफ एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जिसे एशिया कप में भारतीय प्रदर्शन महज फ़िल्मी ड्रामा लगता है जिसमें हर पात्र ने अपना रोल बेहद बेशर्मी के साथ निभाया है, जिसमें सरकार, देश का क्रिकेट बोर्ड, आईसीसी और कुछ हद तक खिलाड़ी भी शामिल माने जा सकते हैं l

खिलाड़ियों और कोच का पाकिस्तानी खिलाड़ियों से दूरी बनाना, हाथ ना मिलाना, पाकिस्तानी खिलाड़ियों द्वारा अभद्र हरकतें कर भारतीय खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों को चिढ़ाना, नीचा दिखाना और बंदूक दिखा कर बेटी बहनों के सिंदूर उजाड़ने वाली नीच हरकत की याद दिलाना ना सिर्फ निंदनीय है बल्कि अमानवीय भी है l लेकिन उन भारतीय खिलाड़ियों, बोर्ड आकाओं को भी तो शर्म आनी चाहिए, जोकि चोरी छिपे, कैमरे की नज़र से दूर पाकिस्तानियों से हाथ और गले मिला रहे थे l

भले ही भारत ने पाकिस्तान को रौंद डाला और भारत का झंडा बुलंद कर दिया लेकिन जीत का जश्न मनाने वालों, अपने खिलाड़ियों को खुदा बनाने वालों और खिलाड़ियों की मेहनत और धमाकेदार जीत को पहलगाम का बदला बताने वालों से पूछा जा रहा है कि क्या निर्दोषों की हत्या का बदला क्रिकेट की जीत से चुकाया जा सकता है? धीमी आवाज में ही सही कई पूर्व खिलाड़ी भी कह रहे हैं कि यदि पाकिस्तान को सबक सिखाना ही था, नीचा दिखाना ही था तो पाकिस्तान के रहते टूर्नामेंट में खेलना ही नहीं चाहिए था l लेकिन दूसरा पक्ष कह रहा है कि भारत ने खेल कर अच्छा सबक सिखाया है l कुल मिला कर भारतीय जीत के बाद कुछ नये सवाल उठ खड़े हुए हैं l पाकिस्तान के साथ खेल रिश्तों की दरार गहरा गई है , जिसका असर अन्य खेलों पर पर भी पड़ेगा और आने वाले सालों में बहुत से विवाद विकराल रूप ले सकते हैं l

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
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