हॉकी में पुरुषों के आठ ओलिंपिक गोल्ड और 1975 में विश्व विजेता बनना शानदार प्रदर्शन रहा है तो 2002 के कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्णिम प्रदर्शन महिला हॉकी की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है l इससे पहले 1982 के एशियायी खेलों में महिला खिलाड़ियों ने स्वर्णिम प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाया था l उक्त ऐतिहासिक प्रदर्शनों से जुड़े कुछ पुरुष और महिला खिलाड़ियों ने हाल फिलहाल के कुल भारतीय प्रदर्शन को ना सिर्फ शर्मनाक करार दिया बल्कि ज्यादातर की राय में भारतीय हॉकी तेजी से पतन की तरफ बढ़ रही हैl पूर्व खिलाड़ियों ने तो यहाँ तक कह डाला है कि हमारी हॉकी उल्टी चाल चल रही है l. खासकर, कोच हरेंद्र सिँह ने जबसे महिला टीम के हेड कोच का पद त्याग किया है आरोप प्रत्यारोपों और निंदा – काट का सिलसिला चल निकला हैl
हरेंद्र कितने गुनहगार हैं यह तो जांच का विषय है लेकिन समस्या की जड़ कुछ सीनियर खिलाड़ियों को बताया जा रहा है, जोकि अपनी मर्जी के कोच और सपोर्ट स्टाफ चाहती हैं l उन्हें खेलते सालों बीत गए हैं लेकिन रिजल्ट के नाम पर जीरो हैं l हाल के कुछ प्रदर्शनों पर नज़र डालें तो महिला हॉकी रसातल में जा रही है और यही हाल पुरुष हॉकी का भी होने जा रहा है l कुछ पूर्व खिलाड़ियों, कोचों और अन्य का ऐसा मानना है l कुछ एक तो यहाँ तक कह रहे हैं कि जल्दी ही महिला हॉकी जैसा हाल पुरुषों का भी हो सकता है, क्योंकि हॉकी इंडिया का राज काज कमजोर हाथों में चला गया है l डर इस बात का भी है कि दादा प्रवृति के कुछ सीनियर पुरुष खिलाड़ी भी बागी हो सकते हैं और बड़ा विस्फोट कर सकते हैं l
जूनियर, सीनियर और तमाम वर्गों में भारतीय पुरुष और महिला टीमों की विफलता का बड़ा कारण उन खिलाड़ियों को माना जा रहा है जोकि सालों से भारतीय हॉकी के सीने पर मूंग दल रहे हैं l इनमें से ज्यादातर बूढ़े हो चुके हैंl एक पूर्व कोच के अनुसार तीन से पांच साल उम्र घटा कर हॉकी इंडिया के लाडले बने इन खिलाड़ियों को यदि बाहर का रास्ता नहीं दिखाया गया तो देश की हॉकी पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैl
कुछ पूर्व महिला खिलाड़ियों की मांग है कि महिला टीम के साथ बेहतर रिकॉर्ड वाली पूर्व चैंपियनों को जोड़ा जाए, जोकि उनकी समस्याओं को बेहतर समझ सकती हैं l उन्हें कोच बनाया जाए तो बहुत सी समस्याएं स्वतः दूर हो सकती हैं l
लेकिन उन सीनियर खिलाड़ियों की दादागिरी से निपटना मुश्किल हो गया है जोकि गैंग बना कर कोच, टीम प्रबंधन और जूनियर खिलाड़ियों को डरा धमका रही हैं l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
