फसाद की जड़ चौबे पर रहम क्यों मंत्री जी?

trending sports

तमाम उठा पटक और आरोप प्रत्यरोपों के बाद अंततः भारतीय फुटबाल प्रेमियों और खिलाड़ियों के लिए खुश खबरी आई है कि 14 फरवरी से आईएसएल की शुरुआत होने जा रही है l तारीफ़ की बात यह है कि यह घोषणा देश के खेल मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा की गई है l सम्भवतया भारतीय खेल इतिहास में यह अपनी तरह का पहला प्रकरण है जब मृत्यु सैय्या पर पड़े किसी खेल पर देश के खेल मंत्री की कृपा हुई हो l देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित फुटबाल लीग की शुरुआत होने की खबर से भाग लेने वाले धनाढय क्लबों के मालिकों के चेहरे की रौनक लौट आई है लेकिन खिलाड़ी अब भी उहा पोह की स्थिति में हैं l उन्हें अब भी भरोसा नहीं हो रहा l दूसरी तरफ देश का आम फुटबाल प्रेमी पूछ रहा है कि अखिल भारतीय फुटबाल फेडरेशन और उसके अध्यक्ष पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई l तो क्या गले की हड्डी बने कल्याण चौबे को अभयदान दिया गया है?
देखा जाए तो सारे फसाद की जड़ फेडरेशन है, जिसने ना सिर्फ फुटबाल को नर्क में पहुँचाया है दुनियाभर में भारतीय फुटबाल को हंसी का पात्र भी बनाया है l फुटबाल जानकार और पूर्व खिलाड़ी यह भी पूछ रहे हैं कि फेडरेशन अध्यक्ष कल्याण चौबे को पद से क्यों नहीं हटाया गया ? साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि खेल मंत्री देश के उन अन्य खेलों कि खबर क्यों नहीं लेते जिनमे सालों से जंगलराज चल रहा है l यह ना भूलें कि फुटबाल देश को आहत करने वाला सबसे नालायक खेल बन गया है, जिसने पिछले कई दशकों से सिर्फ अपयश कमाया है, देश का नाम सम्मान गिराया है l

हालांकि खेल मंत्री ने आईएसएल को पटरी पर लाने में बड़ी भूमिका निभाई है l लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय और नंबर एक खेल में भारत का कोई भविष्य नहीं है l 140 वें पायेदान पर खड़े, 150 करोड़ की आबादी वाले देश की फीफा रैकिंग न सिर्फ शर्मसार करती है बल्कि खेल मंत्री के फुटबाल प्रेम पर भी सवालिया निशान खड़ा होता है l देश भर में कल्याण चौबे को पद से हटाने की मांग की जा रही थी तो उसे अभय दान क्यों? साथ ही आईएसएल क्लबों पर भी नकेल डालने की मांग की जा रही है जोकि अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों के लिए खिलाड़ियों को रिलीज़ नहीं करते या खिलाड़ी जानबूझकर देश के लिए खेलना नहीं चाहते l
वही खलीफा प्रवृति के खिलाड़ी कुछ दिन पहले तक घड़ियाली आंसू बहा बहा रहे थे l क्या खेल मंत्री ऐसे खिलाड़ियों और क्लबों को खबरदार करेंगे?

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
Share:

Written by 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *