पिछले साल भर से हमारा सरकारी तंत्र, खेल मंत्रालय, खेल प्राधिकरण, ओलिंपिक संघ और खेलों का कारोबार करने वाले अवसरवादी बार बार और लगातार भारत में ओलिंपिक खेलों की मेजबानी की हुंकार भरते रहे हैं l पूरे देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जैसे कि 2036 क़े ओलम्पिक भारत कि झोली में आ गिरे हैं l लेकिन हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक कमेटी ने भारत क़े दावे पर हल्की सी चपतलगाते हुए कहा है कि ‘पहले अपना घर ठीक करें’l
घर ठीक करने क़े लिए क्यों कहा गया है? यह सवाल भारतीय खेल प्रेमी, खिलाड़ी और देश में खेलों क़े ठेकेदार जानना चाहते हैं l कुछ तो यहाँ तक कह रहे हैं कि आईओसी भारत की तरक्की से जलती है l यूरोप और अमेरिका क़े देश दुनिया क़े सबसे बड़े लोकतंत्र की चहुमुखी प्रगति से खौफ खाते हैं l दूसरी तरफ देश क़े अंदर ही एक ऐसा वर्ग भी है जोकि बार बार भारतीय खेल आकाओं को सही समय आने पर ओलम्पिक आयोजन क़े लिए नेक सलाह देता आया है l लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई l अंततः अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति ने दुनिया क़े सबसे बड़े लोकतंत्र क़े दावेदारों को आईना दिखा दिया है l
बेशक़, हर भारतवासी अपने खेलों की तरक्की प्रगति चाहता है l लेकिन नेताओं और उनके ज़ी हुजूरों को इतना तो समझ लेना चाहिए कि ओलम्पिक कोई गली कूचे क़े खेल नहीं हैंl यह भी जान लें कि आईओसी की हैसियत आईओए और भारतीय खेल संघो से कहीं ऊपर है, जोकि भ्र्ष्टाचार और व्यविचार में धंसे पड़े हैं l सूत्रों की माने तो ओलम्पिक समिति ने भारत क़े दावे पर जो चुटकी काटी है उसका सीधा इशारा वाडा की रिपोर्ट, खेल हैसियत और मेजबान शहर से हैl यह ना भूलें कि सऊदी अरब, तुर्की और इंडोनेशिया जैसे देश भी मेजबानी क़े मजबूत दावे क़े साथ मैदान में हैं l यह जानते हुए भी कि भारतीय खिलाड़ी नशाखोरी में पहले नंबर पर हैं और पेरिस ओलम्पिक में एक भी गोल्ड नहीं जीत पाए तो ओलम्पिक मेजबानी का दावा हास्यास्पद लगता है l शायद आइओसी का इशारा भी दुनिया क़े सबसे बड़े लोकतंत्र क़े खेल भ्र्ष्टाचार की तरफ है l तो क्या पीटी उषा, खेल मंत्रालय और देश का खेल प्राधिकरण देशवासियों की भावनाओं से खेल रहे हैं? यही ऐसा है तो यह बड़े जांच का विषय है l यदि दावे में दम है तो निश्चित रूप से आगे बढ़ें वरना देशवासियों क़े खून पसीने की कमाई को व्यर्थ क़े दावों और विदेश दौरों पर बर्बाद ना करें.
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
