पिछले कुछ दिनों से समाचार पत्र पत्रिकाओं और सोशल मीडिया में खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स कोटे की भर्ती के विज्ञापन छपने लगे हैं l सालों साल खिलाड़ियों की अनदेखी के बाद अब हॉकी, फुटबाल, क्रिकेट, टीटी, टेनिस, ऐथलेटिक, बैडमिंटन, जूडो, तैराकी, जिम्नास्टिक, वॉलीबॉल, कुश्ती, मुक्केबाजी आदि खेलों से जुड़े खिलाड़ियों के लिए देर से ही सही कुछ एक दरवाजे खुल गए लगते हैं l फ़िरभी कुछ भी दावे से नहीं कहा जा सकताl लेकिन लाखों बेरोजगार खिलाड़ियों के मुरझाए चेहरों पर उम्मीद जरूर दिखाई दे रही है l हालांकि ज्यादातर की उम्र निकल गई है l
यूँतो गारंटी से कुछ भी नहीं कह सकते लेकिन सालों से खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी पाना सपने जैसा हो गया था l पिछले बीस सालों में कुछ एक विभागों में ही खिलाड़ियों की भर्ती हो पाई है l एक वक्त ऐसा भी था जब राष्ट्रीय स्कूली खेलों, अंतर विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को आसानी से नौकरियां मिल जाती थीं l लेकिन आज आलम यह है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी बेरोजगार हैं और दर दर भटक रहे हैं l
खिलाड़ियों के लिए जिन विभागों के दरवाजे हमेशा खुले रहते थे उनमें रेलवे, सेना, पुलिस, बैंक, बीमा कम्पनियाँ, पोस्टल, सेल, गेल, इंडियन आयल, डीडीए, डीटीसी, ए जी सी आर, एफसी आई, डेसू, एयर इंडिया, एयर लाइन्स, खाद्य निगम और दर्जनों अन्य विभागों में खिलाड़ियों के लिए स्थान सुरक्षित थे l खिलाड़ियों की बड़े पैमाने पर भर्ती के चलते तमाम सरकारी और गैर सरकारी विभागों ने मजबूत टीमों का गठन किया और यहीं से निकल कर राष्ट्रीय टीमों में श्रेष्ठ खिलाड़ियों को शामिल किया जाता था l
चूंकि पिछले कई सालों से खिलाड़ियों को नौकरियां नहीं मिल पा रहीं ऐसे में सरकारी नौकरियों के विज्ञापन देख कर पहली नज़र में विश्वास नहीं हो रहा l सच तो यह है कि खिलाड़ियों को इस देश की सरकारें हमेशा से छलती आ रही हैं l ज़ाहिर है भरोसा करना मुश्किल है l यहाँ तक कहा जा रहा है कि चुनाव जीतने के लिए खिलाड़ियों को बरगलाया जा रहा है l यदि ऐसा है तो सरकारों के खेल प्रेम पर तरस आता है l
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