लक्ष्य सेन की हार के साथ ही इंडिया ओपन 750 से मेजबान भारत की चुनौती समाप्त हो गई थी l लेकिन अभी कुछ और दाग़ लगने बाकी थे और मान सम्मान बचाने का भारतीय तरकश से निकला अंतिम तीर भी बोथरा साबित हुआ l पीवी सिंधु, प्रोनोय, सात्विक चिराग – चिराग सेठी की जोड़ी और लक्ष्य सहित तमाम खिलाड़ी जिस प्रकार एक एक कर दौड़ से बाहर हुए उसे देखते हुए यह तो कहा ही जा सकता है कि भारतीय बैडमिंटन अपने बुरे दौर से बाहर नहीं निकल पा रही है l खासकर बड़े नाम वाले खिलाड़ियों का बुरी तरह पिटना इस बात का संकेत है कि कहीं ना कहीं कोई बड़ी गड़बड़ चल रही है l फिर चाहे खिलाड़ियों के शिक्षण प्रशिक्षण की कमी हो या महत्वपूर्ण अवसरों पर फार्म का गड़बडाना l
चलिए मान लिया कि हार जीत खेल का हिस्सा हैं लेकिन मेजबान के साथ साथ उसकी मेजबानी भी बुरी तरह हार को प्राप्त हुई l राजधानी के इंदिरा गाँधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित चैंपियनशिप में विदेशी मेहमान खिलाड़ियों को कदम कदम पर परेशानियों का सामना करना पड़ा l खासकर, साफ सफाई के मामले में स्टेडियम की बदहाली को लेकर दुनियाभर में थू थू हुई l मेहमान खिलाड़ियों और अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसीज ने मेजबान की तैयारियों का खूब मज़ाक बनाया l कुछ विदेशी खिलाड़ियों ने तो टूर्नामेंट से हटने तक की धमकी दे डाली थी l उन्हें जैसे तैसे मनाया गया l बदबूदार कमरे, टूटी फूटी दीवारें और चारों तरफ अव्यवस्था का माहौल मेजबान की तैयारियों का मज़ाक़ उड़ा रहे थे l पक्षियों और कुत्तों के आतंक तथा कचरे के ढेर ने देसी विदेशी खिलाड़ियों के सामने साई, खेल मंत्रालय और देश का जमकर मज़ाक़ बनाया l
इसमें दो राय नहीं कि बैडमिंटन पिछले कई सालों से देश के पदक विजेता खेलों में शामिल रहा है लेकिन हाल के प्रदर्शन की दो तरफ़ा मार झेलने के बाद इस खेल, खिलाड़ियों और खेल आकाओं पर से भरोसा उठने लगा है l यह ना भूलें कि हाल के आयोजन से मेजबान की छवि बुरी तरह प्रभावित हुई है l कुछ विदेशी खिलाड़ी तो यहाँ तक कहते पाए गए कि ओलिंपिक मेजबानी का दावा करने वाले देश को अपनी गिरेनान में झाँक लेना चाहिए l इसके साथ ही बैडमिंटन महासंघ और साई को बुरी तरह कोसने का सिलसिला चल निकला है l
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