‘फ़र्ज़ी जन्मप्रमाण पत्र देने पर 11 पहलवान निलंबित’, यह खबर प्रकाशित हुई तो पहलवानों के अभिभावक, कोच और सम्बंधित फेडरेशन अधिकारी सकते में आ गए l हालांकि पहलवानों के कोच, माता पिता और अखाड़ों से जुड़े गुरुजन कह रहे हैं कि पहलवानों के साथ साजिश हुई है l लेकिन उम्र की धोखाधड़ी का यह पहला और अकेला मामला नहीं है l फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार खुद फेडरेशन ने आगे बढ़कर धोखाधड़ी करने वालों को धर दबोचा है l भारतीय खेलों का पोस्टमॉर्टम किया जाए तो सैकड़ों नहीं हजारों लाखों खिलाड़ी उम्र के फ़र्ज़ीवाड़े का सुखभोग कर रहे हैं, ऐसा देश के खेल जानकारों और उम्र की धोखाधड़ी की निगरानी करने वालों का मानना है l
देश के सभी खेलों में खिलाड़ियों की उम्र घटाने का खेल वर्षों से चल रहा है l कुछ कोचों और खेल संघ से जुड़े अधिकारियों की मानें तो माता पिता, कोच और फेडरेशन अधिकारियों की मिली भगत से यह गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है l छोटी आयुवर्ग के तमाम आयोजनों में नब्बे फीसदी या अधिक खिलाड़ी बड़ी उम्र के मिल जाएंगे l
हॉकी, फुटबाल, बैडमिंटन, टेनिस, बास्केटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक, तैराकी, जिम्नास्टिक, हैंडबॉल और लगभग सभी खेलों में हर दूसरा खिलाड़ी आयु सीमा का उल्लंघन करता नज़र आएगा l स्कूल और अकादमी को रिजल्ट चाहिए जिसके लिए खिलाड़ी की उम्र घटा दी जाती है l उसे एक दो या चार छह साल छोटे खिलाड़ियों के सामने उतार कर कोच, स्कूल और अकादमी वाह वाह लूट ले जाते हैं l कोई भी यह नहीं सोचता कि देश के खेलों को कितना नुक्सान उठाना पड़ता हैl कोई भी यह जानने का प्रयास नहीं करता कि खेल जगत में भारत की किस कदर थू थू होती है l
हाल में एक सरकारी सर्वे से पता चला है कि भारतीय खेलों को उम्र की धोखाधड़ी घुन की तरह कमजोर कर रही है l सरकारें और खेल संघ सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं l लेकिन बहुत हो लिया l यदि अब भी गंभीरता नहीं दिखाई गई तो भारतीय खेल आज जहां हैं वहां से भी बहुत नीचे लुढ़क सकते हैं l सच तो यह है कि भारतीय खेलों के शर्मनाक प्रदर्शन का सबसे बड़ा कारण उम्र की धोखाधड़ी ही है l ऐसे में प्रतिभावन खिलाड़ी धोखेबाजों से पिछड़कर गुमनामी में खो जाते हैं l Sajwan
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
