ओलिंपिक 2036 की मेजबानी पाने के लिए भारत सरकार, भारतीय ओलम्पिक संघ, गुजरात सरकार और तमाम खेल प्रेमियों ने पूरी ताकत झोंक दी है l हालांकि भारत के दावे को दमदार नहीं माना जा रहा लेकिन देश में खेलों की बड़ी समझ रखने वाले और खेल संघो के शीर्ष अधिकारी यह मान बैठे हैं कि ओलम्पिक मेजबानी पाने से भारत को कोई नहीं रोक सकता l लेकिन मेजबानी के लिए इंडोनेशिया, तुर्की, चिली मिश्र और दक्षिण कोरिया भी मैदान में डटे हुए हैं l खबर है कि कतर भी पूरे दम ख़म के साथ दौड़ में में शामिल हो गया है l अर्थात ओलिंपिक मेजबानी का सम्मान पाना आसान नहीं हैl
मेजबानी किसको मिलेगी अभी से कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा l किस देश के कितने अवसर हैं उस देश के खेलों की स्थिति, अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति से उसकी नजदीकियां, उसके खिलाड़ियों के ओलिंपिक प्रदर्शन, खेल भावना और ओलिंपिक आंदोलन में उसकी भागीदारी पर काफी कुछ निर्भर करता है l यदि वोटिंग से दावेदार का फैसला होता है तो सदस्य देशों के साथ उनके संबंधों को भी जाँचा परखा जा सकता है l
इसमें दो राय नहीं कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है l 150 करोड़ की आबादी वाला देश दो एशियाड और एक कॉमनवेल्थ खेल का आयोजन कर चुका है l जहाँ तक ओलम्पिक में प्रदर्शन की बात है तो पिछले सौ सालों में हॉकी में आठ ओलिंपिक स्वर्ण पदकों के अलावा शूटिंग और जेवलिन थ्रो में एक एक स्वर्ण जीते हैंl पिछले ओलिंपिक में भारत पदक तालिका में 71 वें स्थान पर रहा था l इसमें दो राय नहीं कि भारत सरकार ने ओलिंपिक पाने और सफल मेजबानी के लिए सब कुछ दाँव पर लगा दिया हैl सबसे बड़ी बात यह है कि खुद सरकार हर हाल में मेजबानी के लिए आतुर है l लेकिन एक बड़ा वर्ग कह रहा है कि सरकार पहले एशियायी खेलों का आयोजनतो करके दिखाए l ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि वर्तमान सरकार ने अब तक कोई महाद्वीपीय खेल आयोजन भी नहीं किया l वैसे भी जाने माने खेल पत्रकार, खिलाड़ी और खेल प्रशासक दबी जुबान में कह रहे हैं कि ओलिंपिक मेजबानी पाने के अवसर कम हैं l ऐसे में बेकार की जगहंसाई से बचना ही बेहतर रहेगा l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
