बचपन में पढ़ा – सुना करते थे कि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है l जब थोड़े समझदार हुए तो पता चला कि भारत महान का कोई भी राष्ट्रीय खेल नहीं है l हॉकी को तो बस यूँ ही खेल श्रेष्ठ बना दिया गया था l लेकिन पिछले पचास सालों में भारतीय हॉकी ने देश के मान सम्मान को जो आघात पहुँचाया है उसे देखते हुए यह तो कहा ही जा सकता है कि यदि कहीं संविधान में हॉकी को राष्ट्रीय खेल का दर्जा दे दिया जाता तो बहुत बड़ी भूल हो जाती l
आठ ओलंपिक गोल्ड जीतने वाले देश की हॉकी आज कहाँ है बताने की जरुरत नहीं है l हाल ही में खेले गए एफ आई एच प्रो लीग के सभी चार मैच हारने वाली भारतीय टीम का प्रदर्शन बताता है कि दस देशों के खेल में हम किस कदर फिसड्डी बन कर रह गए हैं l दूसरी तरफ अघोषित राष्ट्रीय खेल क्रिकेट में भारतीय खिलाड़ी लगातार देश का नाम रोशन कर रहे हैं, मैच और खिताब जीत रहे हैं और देशवासियों को बम पटाखे फोडने वाली ख़ुशी दे रहे हैं l 15 फरवरी की सांय जब भारतीय हॉकी टीम अर्जेटीना के विरुद्ध हार बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी तो दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेट टीम घोर प्रतिद्वन्दवी पाकिस्तान पर जीत पाने के लिए आत्मविश्वास से लबालब थी l हॉकी में फिर बुरी तरह हारे और क्रिकेट में जीत मिली l क्रिकेट टीम की जीत के साथ ही पूरे देश में आतिशबाजी शुरू हो गईl खूब बम पटाखे फोड़े गए l क्रिकेट की महां जीत के शोर में हॉकी की शर्मनाक हार का शोक दब कर रह गया l इसलिए क्योंकि फिसड्डी हॉकी की अब कोई परवाह नहीं करता l
जहाँ तक लोकप्रियता की बात है तो क्रिकेट राष्ट्रीय खेल बन चुका हैl उसकी टक्कर में हॉकी की कोई औकात नहीं है l वैसे भी जो खेल देशवासियों के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाए, देश का नाम खराब करे उसकी वकालात कब तक करते रहेंगे l
जिस खेल के राष्ट्र नायक को भारत रत्न देने में दगा बाजी की गई और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को सम्मान दे दिया गया उसी दिन तय हो गया था कि देश की सरकारों को हॉकी से सिर्फ दिखावे का प्यार और लगाव हैं l दूसरी तरफ क्रिकेट अपना कद बढाती चली गई और आज क्रिकेट भारत का खेल नंबर एक बन गया है l कुल मिला कर हॉकी को राष्ट्रीय खेल का दर्ज़ा नहीं दिया जाना शायद सही फैसला था l लेकिन क्रिकेट ने अपना कद इतना बढ़ा दिया है कि उसे राष्ट्रीय खेल के गीदड़ पट्टे की ज़रूरत कदापि नहीं है l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
