भारत खेल महाशक्ति बनने क़ी हुंकार भर रहा हैं l ओलंपिक मेजबानी का दावा भी कर रहा हैंl लेकिन अखिल भारतीय फुटबाल फेडरेशन अपनी महिला खिलाड़ियों के लिए प्रॉपर किट तक का इंतजाम नहीं कर सकताl ऑस्ट्रेलिया में ए एफ सी कप से ठीक एक दिन पहले महिला खिलाड़ियों ने फेडरेशन के नाकारापन का मुद्दा उठाया और अगले ही दिन वियतनाम से हार गईं l भाग लेने वाली सभी 26 खिलाड़ियों ने लिखित विरोध व्यक्त किया है कि महिला टीम के लिए बनाई गई ड्रेस 14 – 15 साल की लड़कियों के हिसाब से तैयार की गई हैं l ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और खेल महाशक्ति बनने के दावेदार देश की महिला खिलाड़ियों को अपनी ऑफिसियल ड्रेस के बिना ही उतरना पड़ा l
बेशक़, इससे बड़े शर्म की बात और नहीं हो सकती कि जिस देश के पुरुष खिलाड़ी फिसड्डी और अक्षम घोषित हो चुके हैं, उस देश की महिलाओं ने हमेशा से विवादों और भ्र्ष्टाचार में डूबी फेडरेशन को शर्मसार होने से बचाने के लिए कदम बढ़ाया लेकिन उनकी मेहनत पर पानी फिरता नज़र आ रहा हैं l यह हाल उस विकसित भारत का है जिसके नेता – सांसद देश को खेल महाशक्ति बनाने का दम भरते आ रहे हैं l उस देश को अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल बिरादरी के सामने लज्जित होना पड़ा हैं जोकि जगत गुरु और कभी कभार खेल गुरु बनमे की हुंकार भरता है l.
पुरुष टीम के शर्मनाक प्रदर्शन पर पर्दा डालने के लिए महिला खिलाड़ियों ने जो कुछ कमाया था उस पर पानी फिर सकता हैं क्योंकि मुकाबले से पहले ही खिलाड़ियों के हौसले पस्त हो गए हैं l दबाव का उनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ना स्वाभाविक हैं l देश के फुटबाल प्रेमी और पूर्व खिलाड़ी सरकार और खेल मंत्री से पूछ रहे हैं कि क्या ऐसे भारत खेल महाशक्ति बनेगा ? पूर्व खिलाड़ी जानना चाहते हैं कि फेडरेशन अध्यक्ष कल्याण चौबे और उनकी नाकारा टीम को धक्के मार कर बाहर क्यों नहीं किया जाता? क्यों खेल मंत्री और अन्य जिम्मेदार लोग गुनहगारों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही नहीं करते?
बेशक़, पानी सर से ऊपर हो चुका हैं l पुरुष टीम की नैय्या कब की डूब चुकी हैं l महिलाओं ने उम्मीद जगाई थी लेकिन उन्हें फेडरेशन के चिन्दी चोरों के कारण आघात पहुंचा हैं l कमाल की बात यह हैं कि देश के नेता सांसद और फेडरेशन का कल्याण कारी अध्यक्ष मौन हैं l उसे कौन शह दे रहा है, देश जानता है l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
