देर से ही सही ज़ावी ह्रनाडेज और पेप गार्डियोला का भूत भारतीय फुटबाल फेडरेशन के सिर से उतर गया है l ए आई एफएफ ने मान लिया है कि फेडरेशन को भेजे गए दोनों मेल फ़र्ज़ी थे l वैसे भी फुटबाल की थोड़ी बहुत समझ रखने वाले खुशफुसा रहे थे और कह रहे थे कि ज़ावी और गाड़ियोंला शायद पगला गए हैं l आखिर क्या सोच कर उन्होंने भारतीय टीम के मैनेजर पद के लिए आवेदन किया है l जोकि उन्होंने ऐसा नहीं किया l
उनके आवेदन पर उँगलियाँ उठ ही रही थीं कि खुद फेडरेशन ने आगे कूद कर सफाई दे दी है l सफाई में कहा गया है कि दोनों नाम से आवेदन मिले जरूर थे लेकिन इनकी सत्यता की पुष्टि नहीं हो सकी है l हालांकि एक फेडरेशन अधिकारी ने माना कि ज़ावी का नाम चर्चा में था परन्तु वह फेडरेशन की बजट सीमा से बाहर है l अर्थात उक्त दोनों नामों पर अब कोई चर्चा नहीं होने वाली l
फेडरेशन ने अपनी सफाई में कहा है कि किसी 19 साल के युवक ने ज़ावी के नाम से फ़र्ज़ी मेल डाल कर शरारत की थीl लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि भारतीय फुटबाल को संचालित करने वाली संस्था इस कदर गैर जिम्मेदाराना हरकतें क्यों कर रही है? यह कैसे मान लिया गया कि बार्सिलौना फुटबाल क्लब के सुपर खिलाड़ी और नामी कोच ज़ावी लुटी – पिटी और बर्बाद फुटबाल को गले लगा सकते हैं l हालांकि तस्वीर साफ हो गई है लेकिन भारतीय फुटबाल की एक बार फिर थू थू हुई है l कुछ पूर्व खिलाड़ी कह रहे हैं कि जो फेडरेशन मैच जीतने और विश्व कप की पात्रता पाने के लिए झाड़ फूँक करा सकती है, ओझाओं और भविष्यवक्ताओं की सेवाएं ले सकती है और उन्हें लाखों का भुगतान कर सकती है, उसके लिए किसी भी लेवल तक गिरना बड़ी बात नहीं है l कुछ पूर्व खिलाड़ी और नाराज फुटबाल प्रेमी तो यहाँ तक आरोप लगा रहे हैं कि ज़ावी और गाडियोला के नाम ध्यान भटकाने के लिए जोड़े गए थे l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
