भारतीय फुटबाल टीम के स्टार स्ट्राइकर सुनील क्षेत्री ने शायद ही कभी सोचा होगा कि उसे अपने ही कोच के हाथों इस कदर बेदखल कर दिया जाएगा l चौदह साल के बनवास के बाद खालिद जमील के रूप में कोई भारतीय राष्ट्रीय टीम का हेड कोच बनाया गया हैl इस बीच एआई एफ एफ और गोरे कोच मिलीभगत कर भारतीय फुटबाल को बर्बाद करते रहे l हाल फिलहाल जिन 35 खिलाड़ियों को संभावितों में शामिल किया गया हैं उनमें क्षेत्री का नाम शामिल नहीं है l यह देख कर क्षेत्री के प्रशंसकों ने हो हुल्लड़ मचाना शुरू कर दिया है l शायद वे भूल गए हैं कि एक दिन पेले और माराडोना को भी बूट टांगने पड़े थे और अब रोनाल्डो और मेस्सी भी खेल को अलविदा कहने वाले हैं l
फुटबाल की गहरी समझ रखने वाले और खुद क्षेत्री के प्रशंसक मानते हैं कि उसे अब बूट टांग कर मैदान के बाहर की गतिविधियों से भारतीय फुटबाल को गौरवान्वित करना चाहिए l भले ही क्लब स्तरीय फुटबाल से जुड़े रहें लेकिन फिर से वापसी की भूल ना करें l फेडरेशन को भी चाहिए की उसके नेम – फेम का भरपूर लाभ उठाए, उसे कदापि नज़र अंदाज ना करें l हो सके तो उसे भारतीय फुटबाल का ब्रांड एम्बेसडर बना दिया जाए l
इसमें दो राय नहीं कि सुनील एक प्रतिभवान और उपयोगी खिलाड़ी रहे हैं और पिछले बीस सालों में भारतीय फुटबाल को जब कभी गोल की जरुरत पड़ी उसने टीम को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई l लेकिन यह भी सच है कि उसने अधिकांश गोल बेहद कमजोर और फीफा रैकिंग की पिछड़ी रैकिंग वाले देशों के विरुद्ध जमाए फ़िरभी भारतीय फुटबाल प्रेमियों ने उसे रोनाल्डो और मेस्सी के समतुल्य बताया और सम्मान दिया l
हालांकि कुछ चाटुकार विशेषज्ञयों ने उसे भारत का सर्वश्रेष्ठ फारवर्ड करार दिया लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है l जिन फुटबाल प्रेमियों ने पीके बनर्जी, बलराम, इन्दर सिँह, मगन सिँह, भूपिंदर रावत, सुरजीत सेन गुप्ता, शाबिर अली, नरेंदर गुरंग, हरजिन्दर और यहाँ तक कि विजयन को खेलते देखा है उन्हें इक्कीसवीं सदी का कोई भी खिलाड़ी शायद ही रास आए l नतीजा सामने है आज भारतीय फुटबाल की दुनिया भर में हंसी उड़ रही है l 150 करोड़ की जनसंख्या वाले देश के पास एक भी विश्वसनीय खिलाड़ी नहीं है l ऐसे में सुनील के गोलों ने उसे कमाल का खिलाड़ी बना दिया है l इस पत्रकार ने उसे एयर फ़ोर्स और ममता मॉडर्न स्कूल के लिए खेलते हुए करीब से देखा और परखा है और पाया है कि पिछले दो दशकों में वह देश का श्रेष्ठ फॉरवर्ड रहा है l लेकिन उसके अधिकांश गोल 133 वीं रैकिंग की भारतीय फुटबाल से भी फिसड्डी टीमों के विरुद्ध रहे हैं l फ़िरभी वह हमेशा छोटे कद के बड़े खिलाड़ियों में शुमार किया जाता रहेगा l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
