‘फिट इंडिया’, ‘हिट इंडिया’, ‘दौड़ों इंडिया’, ‘खेलो इंडिया’ ‘कूदो इंडिया’ और इस प्रकार के अनेकों संबोधन हर साल अगस्त के महीने में सुनने-सुनाने को मिल जाते हैं। इसलिए क्योंकि 29 अगस्त भारतीय हॉकी के इतिहास पुरुष मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन है, जिसे देशवासी भले ही किसी त्योहार की तरह नहीं मनाते लेकिन सरकार, खेल मंत्रालय, कुछ खेल फेडरेशन और सरकारी टुकड़ों पर पलने वाले कुछ एनजीओ यकायक हरकत में आ जाते हैं। कुकुरमुत्तों की तरह कुछ फर्जी और सरकार के मुंह लगे संगठन अपनी-अपनी दुकाने सजाकर मैदान में उतर जाते हैं। कोई साइकिल में बैठकर दद्दा ध्यानचंद का जन्मदिन मनाता है तो कोई मैराथन दौड़ का आयोजन करता है और कुछ एक तो बिना कुछ करे धरे मुफ्त की पब्लिसिटी और सरकारी पैसा लूट ले जाते हैं।
तीन ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता, सर्वकालीन श्रेष्ठ खिलाड़ी और वह खिलाड़ी जिसके नाम की कसमें खाई जाती हैं उसे आज तक ‘भारत रत्न’ क्यों नहीं मिल पाया? यह सवाल वर्षों से पूछा जा रहा है, जिसका जवाब किसी भी सरकार, खेल मंत्रालय, हॉकी फेडरेशन और हॉकी इंडिया के पास नहीं है। एक सवाल यह भी पूछ लिया जाता है कि सचिन तेंदुलकर भारत रत्न बन सकते है तो ध्यानचंद को क्यों नहीं?
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
