हांग कांग क़े हाथों हुई हार क़े बाद से भारतीय फुटबाल प्रेमियों का गुस्सा सातवें स्थान पर पहुँच गया है l फुटबाल फेडरेशन, फेडरेशन अध्यक्ष, कोच, खिलाड़ियों और खासकर पूर्व कप्तान सुनील क्षेत्री को लेकर बहुत कुछ बुरा भला कहा जा रहा है l फुटबाल प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों का ऐसा आक्रोश शायद ही पहले कभी देखने सुनने को मिला होगा l यह सही है कि फेडरेशन अध्यक्ष कल्याण चौबे और कोच से सवाल किए जाने चाहिए लेकिन सुनील क्षेत्री को कोसना कहाँ तक ठीक है?
संयोग से यह पत्रकार क्षेत्री को बहुत करीब से जानता पहचानता है l आर्मी पब्लिक स्कूल धौलाकुआँ से निकलकर यह स्टार खिलाड़ी सुब्रतो फुटबाल विजेता दिल्ली क़े ममता मॉडर्न स्कूल में पहुंचा और तत्पश्चात भारतीय स्कूल टीम क़े लिए खेला और ऊँचाइयाँ लांधता चला गया l स्कूल स्तर में सुनील को तब बड़ी पहचान मिली जब वह आर्मी स्कूल क़े लिए दिल्ली क़े नामी कोच रमेश चंद्र देवरानी क़े मेमोरियल टूर्नामेंट में खेलने उतरा l देवरानी टूर्नामेंट का प्रमुख आयोजक होने का सौभाग्य इस पत्रकार को प्राप्त था, जिसके आयोजक सचिव मोती बाग स्कूल क़े नामी कोच पी एस पुरी थे l क्षेत्री क़े बारे यह सब इसलिए बताया जा रहा है क्योंकि उसके उत्थान को राष्ट्रीय स्तर क़े खिलाड़ी रहे इस पत्रकार ने करीब से देखा परखा है l
बेशक़, भारतीय फुटबाल की बदहाली से देश क़े फुटबाल प्रेमी दुखी हैँ l मीडिया, सोशल मीडिया और पूर्व खिलाड़ी नाराज हैँ और फेडरेशन, टीम, कोच और चयनकर्ताओं को धक्के मार कर बाहर करने की मांग की जा रही है l लेकिन सुनील क्षेत्री को बुरा भला कहना शायद न्याय संगत नहीं है l इसलिए क्योंकि उसने भारतीय फुटबाल क़े लिए बड़ा योगदान दिया है l कुछ महीने पहले तक उसे गोल मशीन कहा जाता रहा लेकिन अब उसे टीम से बाहर करने की मांग की जाने लगी है l ऐसा खिलाड़ी जिसका नाम मेस्सी और रोनाल्डो क़े साथ जोड़ा जाने लगा था उसे अब बुरा भला कहा जा रहा है l राष्ट्रीय टीम क़े शर्मनाक प्रदर्शन क़े बाद उसे टीम से बाहर करने की मांग जोरों पर है l कोई कह रहा है कि वह टीम पर बोझ बन गया है तो कोई इल्जाम लगा रहा है कि वह उभरते खिलाड़ियों क़े लिए बाधा है l कुछ एक की राय में वह अपनी कमाई पर पानी फेर रहा है l
फुटबाल जानकारों और विशेषज्ञयों की माने तो भारतीय फुटबाल की मौत हो चुकी है l आज भारत ऐसी टीम बनकर रह गई है जोकि किसी से भी पिट सकती है l एक भी खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम क़े लायक नहीं बचा है l यही कारण है कि क्षेत्री को बुरा भला कहा जाने लगा है l ऐसे में यही सही होगा कि वह वह तुरत फुरत में टीम से हट जाए और अपनी रही सही साख बचा ले l वरना उसका नाम भी भारतीय फुटबाल को बर्बाद करने वालों में जुड़ सकता है और शायद उसे भी खलनायक क़े रूप में याद किया जाएगा l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
