बदहाली, रोने पीटने और एक दूसरे को कोसने वाली भारतीय फुटबाल ने ऑस्ट्रेलिया के रॉयन विलिएम्स को अपने बेड़े में शामिल करने की तमाम औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं
विलिएम्स के भारतीय नागरिकता प्राप्त करने और भारत ले लिए खेलने का रास्ता साफ होने के बाद से देश में मीडिया का एक वर्ग ऊँची कुलांचें भर रहा है l कुछ अंधभक्त तो यहाँ तक कहने लगे हैं कि अब भारतीय फुटबाल का कायाकल्प होने जा रहा है l
फिलहाल फेडरेशन अपना नाकारापन छिपाने के लिए अति उत्साह में आ गई है l उसे जैसे सोने का अंडा देने वाली मुर्गी मिल गई है l लेकिन खेल की समझ रखने वाले पूछ रहे हैं कि एक खिलाड़ी के आ जाने से क्या हो जाएगा l वह कौनसा ब्राज़ील, स्पेन, अर्जेटीना या पुर्तगाल से आ रहा है? यह भी समझ लें कि श्रीमान जी 32 साल के हैं और उसके पास ज्यादा वक्त भी नहीं है l इस उम्र में ज्यादातर खिलाड़ी सन्यास लेने के बारे में सोचने लगते हैं l यह भी सच है कि वह रोनाल्डो, मेस्सी जैसी प्रतिभा का धनी नहीं है l फिलहाल उसकी आजमाइश बाकी है l वैसे भी अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता l उम्मीद है कि विलिएम्स इसी माह बांग्लादेश के विरुद्ध खेले जाने वाले मैच में मैदान में उतर सकते हैं l
यह भी खबर है कि भारतीय मूल के खिलाड़ियों को लेकर एआईएफएफ पगला गई है और अधिकाधिक को भारत के लिए खेलने के लिए आमंत्रित करना चाह रही है l तरस आता है भारत की फुटबाल पर! 150 करोड़ की आबादी के पास ग्यारह भरोसे लायक खिलाड़ी भी नहीं हैंl फिलहाल भारतीय फुटबाल अंदर बाहर समस्याओं से घिरी है l सालों से बाहर निकलने में नाकाम रहने के बाद अब नया प्रयोग किया जा रहा है l लेकिन भारतीय मूल के एक दो खिलाडियों से काम नहीं चलने वाला l सच तो यह है कि पिछले कई सालों से देश में अच्छे और स्तरीय खिलाड़ियों की पैदावार नहीं हो पा रही l इसलिए बाहरी खिलाड़ियों को आमंत्रित किया जा रहा है l बेचारी भारतीय फुटबाल!
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
