ख़िताब जीतने वालों पर कड़ी नज़र जरुरी

Football 2

भारत की 15,17 और 23 साल तक की फुटबाल टीमें बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं l मौका मिला तो खिताब भी जीत रही हैं l हालांकि बांग्लादेश, नेपाल, अफगानिस्तान आदि टीमों से पार पाने में हमारे खिलाड़ियों को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है और ज्यादातर ख़िताब जीतने के लिए टाई ब्रेकर का सहारा लेना पड़ता है l चलिए मान लेते हैं कि हमारे खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन यही खिलाड़ी जब बड़े आयु वर्ग में भाग लेते हैं या सीनियर टीम में स्थान बनाने में सफल हो जाते हैं तो इनका प्रदर्शन बड़े आयुवर्ग में हल्का पड़ जाता है l ऐसा क्यों है? सुब्रतो फुटबाल आयोजकों ने भारतीय फुटबाल के काले पहलू को उजागर कर देश के फुटबाल प्रेमियों को सच्चाई से अवगत कराया है l साथ ही यह सन्देश भी दिया है कि आयुवर्ग की जीतोँ पर इतराने की जरुरत नहीं है, बल्कि खिताब जीतने वाली टीमों और खिलाड़ियों की उम्र की जांच पड़ताल भी की जानी चाहिए l

कुछ पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के अनुसार भारतीय फुटबाल ऐज फ़्रॉड की शिकार है l अर्थात सभी आयुवर्गों में बड़ी उम्र के खिलाड़ी छोटे खिलाड़ियों को कुचल रहे हैं और उन्हें आगे बढ़ने का मौका नहीं देते l यही बड़े और अधेड उम्र के खिलाड़ी जब सीनियर वर्ग में उतरते हैं तो
खेलना भूल जाते हैं l यही कारण है कि भारतीय फुटबाल महाद्वीप और उपमहाद्वीप के फिसड्डीयों के सामने भी टिक नहीं पाती l पिछले बीस सालों के प्रदर्शन पर नज़र डालें तो धोखेबाज भारतीय फुटबाल मैच दर मैच पिछड़ती गई है l भले ही देश की फुटबाल फेडरेशन के अवसरवादी और नाकारा अधिकारी कितना भी झूठ बोलें, कसमें खाएं लेकिन पाप का घड़ा (एज फ़्रॉड ) भर चुका है l पिछले दिनों सुब्रतो मुखर्जी फुटबाल टूर्नामेंट में बड़ी उम्रब की 22 टीमों, अर्थात लगभग दो सौ तथाकथित स्कूली खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया l आयोजकों के अनुसार 15 साल तक के वर्ग में 17 से 19 साल के और 17 साल के वर्ग में 18 से 20 साल के खिलाड़ी बच्चों को कुचलते देखे जा सकते हैं l यही खिलाड़ी जब राष्ट्रीय टीमों में खेलते हैं तो कमजोर पड़ोसियों के सामने घुटने टेक देते हैं l यह सारा गड़बड़ झाला देश की फुटबाल को नियंत्रित करने वाली फेडरेशन की नाक के नीचे होता है l नतीजा देश और दुनिया के सामने है l.

कुछ पूर्व खिलाड़ी और फुटबाल जानकार चाहते हैं कि स्कूल स्तर और छोटे आयु वर्ग के खिलाड़ियों की ठोक बजाकर जांच पड़ताल की जाए और सही आयु वर्ग के खिलाड़ियों को मौका दिया जाए तो भारतीय फुटबाल आगे बढ़ सकती है l

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
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