केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का 91 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह रक्षा मंत्रालय समेत कई अन्य विभाग भी संभाल चुके थे। लातूर स्थित उनके निजी आवास में उन्होंने अंतिम सांस ली। परिवार के सूत्रों ने बताया कि पाटिल कुछ समय से बीमार थे और उन्होंने अपने आवास ‘देवघर’ पर ही अंतिम सांस ली। उनके परिवार में बेटा शैलेश पाटिल, बहू अर्चना और दो पोतियां हैं। उनकी बहू भारतीय जनता पार्टी की नेता हैं।
पीएम मोदी ने जताया दुख
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कहा कि शिवराज पाटिल जी के निधन से व्यथित। वे एक अनुभवी नेता थे, जिन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष और लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्हें समाज के कल्याण में योगदान देने का गहरा जुनून था। पिछले कई वर्षों में मेरा उनसे कई बार सामना हुआ है, सबसे हालिया मुलाकात तब हुई जब वे कुछ महीने पहले मेरे घर आए थे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। ओम शांति।
70 की दशक में चुने गए विधायक
उनका जन्म 12 अक्टूबर, 1935 को हुआ और उन्होंने लातूर नगर परिषद प्रमुख के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और 70 के दशक की शुरुआत में विधायक चुने गए। बाद में, उन्होंने लातूर लोकसभा सीट से सात बार जीत हासिल की। 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा की रूपताई पाटिल निलंगेकर से हार का सामना करना पड़ा।
रक्षा राज्य मंत्री भी रह चुके थे शिवराज पाटिल
शिवराज पाटिल ने साल 1980 में राजनीति में कदम रखा। वह पहली बार सातवीं लोकसभा के लिए चुने गए। वहीं, साल 2004 तक वह सात बार लोकसभा सदस्य चुने गए। बताया जाता है कि साल 1980-1990 के दशक में उन्होंने संसद में संसदीय सदस्य की सैलरी और अलाउंस पर बनी जॉइंट कमिटी में काम किया। बाद में इसी के चेयरमैन भी बने। पाटिल पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में रक्षा राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।
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