भारतीय नौसेना को एक और जबरदस्त हथियार मिल गया है। एंटी-सबमरीन वॉरफेयर यानी पानी के अंदर छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढ़ निकालने और खत्म करने में माहिर जहाज़ INS अर्नाला को आज नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया।इस मौके पर विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में खास समारोह हुआ, जहां भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी मौजूद रहे। INS अर्नाला अब देश की समुद्री सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।
क्यों खास है INS अर्नाला?
INS अर्नाला को खास तौर पर तटीय इलाकों में सबमरीन-विरोधी ऑपरेशन के लिए बनाया गया है। यानी अगर कोई दुश्मन देश अपनी पनडुब्बी से भारत के पानी में घुसपैठ करने की कोशिश करता है, तो ये जहाज़ उसे खोजकर बाहर निकालने और खत्म करने में पूरी तरह सक्षम है।इसके अलावा ये जहाज़ सर्च और रेस्क्यू मिशन, तटीय निगरानी, और कम तीव्रता वाले ऑपरेशन में भी जबरदस्त काम करेगा।
नाम में भी है इतिहास
इस युद्धपोत का नाम महाराष्ट्र के वसई में स्थित अर्नाला किले के नाम पर रखा गया है। ये किला कभी समुद्री सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता था, और उसी विरासत को INS अर्नाला आगे बढ़ा रहा है।
पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’
INS अर्नाला को 80% स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एलएंडटी, महिंद्रा डिफेंस और MEIL जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों ने इसमें अपनी टेक्नोलॉजी दी है।वजन: 1490 टन से ज्यादा,लंबाई: 77.6 मीटर, इंजन: डीज़ल + वॉटरजेट तकनीक,55 से ज्यादा MSMEs ने निर्माण में हिस्सा लिया यह भारत का सबसे बड़ा ऐसा युद्धपोत है जो डीज़ल-वॉटरजेट कॉम्बो से चलता है। मतलब तेज, हल्का और बेहद ताकतवर।
दुनिया भर की नौसेनाओं से मुकाबला
INS अर्नाला की ताकत और डिजाइन इसे अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की एडवांस्ड नेवी के शैलो वॉटर पोतों के बराबर खड़ा करती है। लेकिन जो चीज़ इसे और खास बनाती है, वो है इसकी स्वदेशी बनावट। जहां कई देश अब भी बाहर से तकनीक मंगवाते हैं, भारत ने इसे अपने दम पर तैयार किया है।
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