केंद्र सरकार की ओर से सिविल न्यूक्लियर कानून में हुआ बदलाव, शांति बिल संसद में पास

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केंद्र सरकार की ओर से सिविल न्यूक्लियर कानून में बदलाव के लिए लाया गया विधेयक गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा में पारित हो गया। अब मौजूदा कानून को बदलने के लिए लाए गए विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद केंद्र परमाणु ऊर्जा पर सरकार का एकाधिकार खत्म करने की ओर कदम बढ़ा देगा। इसके साथ ही वाले दिनों में भारत में निजी कंपनियां और यहां तक कि आम व्यक्ति भी परमाणु संयंत्र के निर्माण और इसके संचालन जैसी गतिविधियों में शामिल हो सकेंगे।

रेडिएशन पर प्रतिक्रिया

विधेयक पर चर्चा के दौरान रेडिएशन को लेकर उठी चिंताओं पर मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब तक जनता को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी रेडिएशन घटना की कोई रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनता की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल में सभी जरूरी सावधानियां बरती जाती रहेंगी।

CPI सांसद एए रहीम ने किया विरोध

CPI सांसद एए रहीम ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह परमाणु आपूर्तिकर्ताओं के हित में लाया गया है और इससे जनता की बजाय निजी कंपनियों को फायदा होगा। उन्होंने निजीकरण को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं। वहीं बसपा सांसद रामजी ने भी विधेयक पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि इससे राष्ट्रीय हित और सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े होते हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि परमाणु जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निजीकरण जोखिम भरा है और इस पर व्यापक चर्चा व पुनर्विचार जरूरी है।

शांति बिल देश के विकाश में करेगा मदद

लोकसभा में चर्चा के दौरान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शांति बिल देश की विकास यात्रा को एक नई दिशा देगा। उन्होंने आगे कहा कि “प्रस्तावित कानून का मकसद न्यूक्लियर एनर्जी और कई सेक्टर में इसके इस्तेमाल में बड़ी ग्रोथ को बढ़ावा देना है। साल 2047 तक 100 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा का लक्ष्य रखा है। इसे पूरा करने में परमाणु क्षेत्र महत्वपूर्ण है। सिंह ने कहा कि आज की दुनिया में अलग-थलग रहने का दौर खत्म हो चुका है।

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