New Delhi: Yogi Adityanath ने राज्य के सभी भर्ती बोर्डों के चेयरपर्सन्स को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करते समय किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या संप्रदाय की आस्था और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी से पूरी तरह बचा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रश्नपत्रों की भाषा और विषयवस्तु ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी भी वर्ग की भावनाओं को आघात न पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यही दिशा-निर्देश सभी पेपर सेटर्स को भी सख्ती से पालन करने के लिए बताए जाएं।
नियम तोड़ने वालों पर प्रतिबंध की चेतावनी
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग बार-बार नियमों का उल्लंघन करते हैं, उन्हें तुरंत प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े संस्थानों से कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाए और इस संबंध में बनाए जाने वाले समझौते (एमओयू) में भी स्पष्ट प्रावधान जोड़े जाएं। सरकार का मानना है कि इससे भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और गरिमा दोनों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
बारिश से फसलों के नुकसान का तत्काल आकलन करने के निर्देश
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रही बारिश और उससे फसलों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर भी अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने ज़िलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खुद फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लें और प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का जल्द से जल्द आकलन कराएं। साथ ही राहत आयुक्त को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर स्थिति पर नजर रखें।
विवादित प्रश्नों के बाद सरकार हुई सख्त
दरअसल, हाल के दिनों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में जाति, धर्म और महापुरुषों से जुड़े विवादित सवालों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। हाल ही में यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े विकल्प को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए भविष्य में इस तरह के विवादों से बचने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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Ms. Pooja, |
