New Delhi: बिहार के मुजफ्फरपुर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैली ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। इस रैली में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला और ऐसी भाषा का प्रयोग किया जिसे बीजेपी ने ‘सड़क छाप’ करार दिया। रैली में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की मौजूदगी ने भी विवाद को और गहरा दिया। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही दोनों गठबंधनों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला
रैली में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पिछले 20 साल से चुनाव आयोग की मदद से ‘वोट चोरी’ कर चुनाव जीतते आ रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान का भी जिक्र किया और कहा कि मोदी की लोकप्रियता नहीं, बल्कि ‘चुनावी चालबाजियां’ उनकी जीत का राज हैं। साथ ही, उन्होंने गुजरात मॉडल को भी कटघरे में खड़ा किया।
चुनाव आयोग को लेकर सीधे सवाल
राहुल गांधी पहले भी ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों पर बीजेपी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा चुके हैं। लेकिन इस बार उन्होंने सीधे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मोदी और शाह वोट घटाकर या बढ़ाकर चुनाव जीतते हैं। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इस दावे को कई लोगों ने अव्यावहारिक बताया, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया में हजारों अधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होते हैं।
बीजेपी का पलटवार – ‘कांग्रेस का असली DNA’
बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी के बयान को कांग्रेस की मानसिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिस तरह पीएम मोदी के लिए शब्दों का इस्तेमाल किया, वही कांग्रेस का असली DNA है। भाटिया ने यह भी जोड़ा कि अगर चुनाव में गड़बड़ी होती, तो कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में सत्ता में कैसे आती और बीजेपी राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव कैसे हारती?
रैली में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में 65 लाख वोटरों के नाम लिस्ट से हटाना ‘लोकतंत्र की हत्या’ है। उन्होंने इसे आतंकवाद से भी कमतर नहीं बताया और आरोप लगाया कि बीजेपी विपक्ष को रोकने के लिए वोटर लिस्ट में हेरफेर कर रही है। इस पर बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि राहुल और तेजस्वी ने बिहारियों का अपमान करने वालों को बुलाकर जनता के जख्मों पर नमक छिड़का है।
पुराने बयानों से फिर उठा विवाद
स्टालिन की पार्टी डीएमके के नेताओं के पुराने बयान भी इस बहस का हिस्सा बन गए हैं। दयानिधि मारन का एक वीडियो सामने आया जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार और यूपी के लोग तमिलनाडु में घर बनाते हैं और शौचालय साफ करते हैं। वहीं, स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म को डेंगू और मलेरिया से तुलना करते हुए इसे मिटाने की बात कही थी। बीजेपी और जेडीयू ने इन बयानों को बिहारियों का अपमान करार देते हुए विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया है।
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Ms. Pooja, |
