देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी त्रिनिदाद और टोबैगो की यात्रा पर है। वहां पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और वहां के भारतीय मूल समुदाय के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत किया। इस दौरान उन्होंने त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर को दो विशेष उपहार भेंट किए — प्रयागराज के महाकुंभ का पवित्र जल और अयोध्या के श्रीराम मंदिर की प्रतिकृति।मोदी ने प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए महाकुंभ के अनुभव साझा किए और कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है। उन्होंने बताया कि वे अपने साथ संगम और सरयू नदी का पवित्र जल लाए हैं। इस जल को उन्होंने कमला बिसेसर को सौंपते हुए आग्रह किया कि इसे त्रिनिदाद की गंगा धारा में अर्पित किया जाए। कमला बिसेसर ने प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर इसे पूर्ण श्रद्धा के साथ अर्पित भी किया।
बिहार की बेटी कमला,
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कमला बिसेसर के भारत से भावनात्मक संबंध को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कमला बिसेसर के पूर्वज भारत के बिहार राज्य के बक्सर जिले से थे। उन्होंने स्वयं भी बक्सर की यात्रा की थी और वहां की मिट्टी से जुड़ाव महसूस किया। पीएम मोदी ने कहा कि यहां के अनेक नागरिकों के पूर्वज भी बिहार से आए हैं, इसलिए यह भूमि सिर्फ त्रिनिदाद की ही नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की भी वाहक है।प्रधानमंत्री ने बिहार की ऐतिहासिक भूमिका की भी चर्चा की और बताया कि यह राज्य न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व को लोकतंत्र, शिक्षा, राजनीति और कूटनीति के क्षेत्र में दिशा दिखाने वाला रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भी बिहार नई प्रेरणाओं और संभावनाओं का स्रोत बनेगा।
परंपरा और स्वाद: सोहारी पत्ते में भोजन का अनुभव
इस आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को एक और विशेष सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर द्वारा आयोजित रात्रिभोज में पारंपरिक तरीके से भोजन परोसा गया। भोजन सोहारी के पत्ते पर परोसा गया, जो वहां के भारतीय मूल के लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अनोखे अनुभव को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर साझा करते हुए बताया कि त्रिनिदाद और टोबैगो में त्योहारों और विशेष अवसरों पर आज भी भोजन इसी पत्ते पर परोसा जाता है, जो भारतीय परंपरा से जुड़ा एक भावनात्मक प्रतीक है।प्रधानमंत्री की यह यात्रा त्रिनिदाद और टोबैगो के साथ भारत के सांस्कृतिक और भावनात्मक रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाली रही। भारत की विरासत और पहचान को विश्व मंच पर साझा करने का यह प्रयास भारतीय समुदाय के लिए गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक बन गया
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